इंदिरा गांधी अस्पताल में सोनिया गांधी को ही नहीं मिला इलाज, ले जाई गईं चंडीगढ़

हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर न तो सरकार को भरोसा रह गया है और ना ही नेताओं क। आलम यह है कि मरीज चाहे कितनी भी गंभीर अव्सथा  में हो, नेता भी अब कहने लगे हैं कि शिमला नहीं चंडीगढ़ में ही बेहतर इलाज हो सकता है। दरअसल बीती रात शिमला में सोनिया गांधी की अचानक तबीयत बिगड़ी गयी तो उन्हें शिमला में इलाज ही नहीं मिल पाया। कुछ घंटे उन्होंने अपनी बीमारी से जूझते हुए ही बिताए। यह सब आम आदमी के साथ नहीं हुआ बल्कि देश की  उस शखसियत के साथ हुआ जो अपने आप में निराली  है।

चंडीगढ़ पीजीआई को देर रात अलर्ट कर दिया गया इसके बाद पीजीआई प्रशासन को सूचना दी गई कि यहां सोनिया गांधी को लाया जा सकता है। इसके बाद चंडीगढ़ पीजीआई को देर रात अलर्ट कर दिया गया। इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टर और संबंधित स्टाफ को तैनात करने के साथ-साथ पीजीआई में सुरक्षा बढ़ा दी गई। उसके बाद सोनिया गांधी को पीजीआई लाया गया।

सोनिया गांधी को दिल्ली शिफ्ट किया गया है अब सवाल उठ रहा है कि क्या एमरजेंसी से निपटने के लिए हिमाचल का यह नामी सरकारी अस्पताल सक्षम नहीं है। सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की। तमाम नेता शिमला के आईजीएमसी में इलाज कराने से कतराते रहे हैं। पिछली वीरभद्र सिंह सरकार में खुद स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर बीमार हुए थे तो उन्होंने भी शिमला नहीं चंडीगढ़ में अपना इलाज कराया था। अब सरकार बदलने के बाद ताजा मामला सोनिया गांधी का सामने आया है। उन्हें भी चंडीगढ़ ही इलाज के लिए भेजा गया। रात भर डाक्टरों की निगरानी के बाद सोनिया गांधी को दिल्ली शिफ्ट किया गया है। फिलहाल डॉक्टरों का कहना है कि हो सकता है कि निरंतर सफर के कारण तबीयत बिगड़ी हो।

 

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