ज्ञान वर्धक लेखः वर्ल्ड कप 1983 के दौर की कहानी, पुलिस अधिकारी विनोद सिरोही की जु़बानी

                1983 वर्ल्ड कप के समय कपिल देव भारत में बेहद लोकप्रिय थे | उनका आक्रामक अंदाज बहुत पसंद किया जाता था | उन्ही दिनों गावस्कर को भी पसंद करने वाले भी बड़ी संख्या में थे | दोनों के समर्थन में इनके काफी समर्थक बटे हुए भी थे | वर्ल्ड कप के समय कप्तान कपिल देव थे | तीसरा वर्ल्ड कप था | भारत में वन डे मैच तब तक लोकप्रिय नहीं थे | वर्ल्ड कप में होने वाले सीमित ओवर्स को सिर्फ वर्ल्ड कप खिलाने का तरीका ही समझा जाता था | भारत में उस वर्ल्ड कप को गंभीरता से नहीं लिया गया था | टीमें दो ग्रुप में बटी और अपने ग्रुप की प्रत्येक टीम से 2-2 मैच होने थे |

शुरू के मैचों कि रनिंग कमेंटरी आल इंडिया रेडियो पर उपलब्ध नहीं थी | विदेशी रेडियो सुनने के लिए रेडियो को शोर्ट वेव्स पर सुनना होता था | उस वक्त टीवी लोकप्रिय हो रहा था गाँव में हमारे घर पर भी टीवी था मगर बिजली न आने के कारण शो पीस बना हुआ था | उन दिनों गाँव के लिए रेडियो ही मुफीद था | मीडियम वेव्स और शोर्ट वेव्स 2 तरह के बैंड रेडियो में हुआ करते थे | हालाँकि विदेशों में उन दिनों लॉन्गवेव्स रेडियो भी हुआ करते थे मगर हमारे देश में एसा नहीं था | विदेशी रेडियो स्टेशंस को सुनने के लिए शोर्ट वेव्स का सहारा लेना पड़ता था | लोकल स्टेशंस मीडियम वेव्स पर सुने जाते थे | शोर्ट वेव्स कि विशेषता होती है कि प्रथ्वी के ऊपर वायुमंडल के ऊपर आयनीकृत अलग-अलग लेयर (परतें ) हैं जिनसे टकराकर ये वेव्स रिफ्लेक्ट होकर वापस आ जाती हैं बेहद शक्तिशाली रेडियो तरंगों को खास इलाके में भेजने के लिए ऊपर की तरफ इन तरंगों को भेजा जाता है जो हजारों किमी तक चली जाती हैं | इन आयनीकृत लेयर पर सूर्य की गर्मी का खासा प्रभाव पड़ता है अतः दिन के वक्त रिफ्लेक्शन कम होता है इसलिए रात के वक्त दूर तक बहुत स्पष्ट रेडियो तरंग पहुंचती है और रात को रेडियो ज्यादा स्पष्ट सुनाई पड़ता है | दिन में साफ़ सुनने के लिए एंटीना लगना पड़ता था जिसे आम तौर पर एरिअल बोलते थे | शोर्ट वेव्स पर ही टेलीग्राफ जैसी सर्विस का स्तेमाल होता था | शोर्ट वेव्स पर रेडियो के लिए 13, 16, 19, 25 , 31, 41, 60, 90 , 120 मीटर हुआ करते थे | जो रेडियो के लिए रिज़र्व थे | जिन्हें रेडियो को शोर्ट वेव्स पर सुनने का ध्यान हो तो इन मीटर्स के बीच में किचिढ़-पिचिढ़ कूँ-कूँ पूं-पूं टिल-टिल किल-किल जैसी आवाजें भी सूनी होंगी वो टेलीग्राफ जैसे कम्युनिकेशन की हुआ करती थी जिसके लिए शोर्ट वेव्स का ही स्तेमाल होता था | रेडियो पर शोर्ट वेव्स के स्टेशंस नोब घुमाने से चलने वाली सुईं से मिलाये जाते थे और इतने पास-पास हुआ करते थे कि एक स्टेशन से दूसरा स्टेशन डिस्टर्ब भी हो जाया करता था कभी –कभी 2 स्टेशन भी एक साथ सुनाई पड़ते थे जिस पर मजेदार जोक भी बने | कुली फिल्म में भी देखा होगा | विदेशी स्टेशंस में रेडियो सीलोन सबसे ज्यादा लोकप्रिय था मनोरंजन के लिहाज से पर न्यूज़ के लिए बीबीसी हिंदी उर्दू सेवा लोकप्रिय थी |

लोग खबरों की सच्चाई को पुख्ता बताने के लिए बीबीसी को सूना करते थे | आज बीबीसी हिंदी नेट पर पढ़ें तो ध्यान से देखेंगे कि भारतीय समाचारपत्रों और टीवी चेनल की तरह बीबीसी खुद को सरवाईव करने के लिए एक खेमे में के रूप में आ चुका है और छोटी मामूली खबरों को खास तौर पर जाति धर्म से जुड़ी ख़बरों को हाई लाइट करता है | बीबीसी का हिंदी खबरों में ‘ये बीबीसी लन्दन है भारत की घड़ियों में रात के 8 बज चुके हैं और यंहा लन्दन में शाम के साढ़े तीन बजे हैं " एक जाना पहचाना संबोधन था | रडियो सीलोन पर “ये सीलोन ब्रोडकास्टिंग कारपोरशन का विदेश विभाग है शोर्ट वेव्स 25 और 41 मीटर बैंड पर | ‘ बीबीसी हिंदी को मीडियम वेव्स पर 212 मीटर भी सूना जा सकता था किन्तु उसके लिए बीबीसी ने नेपाल,लंका और सेशल्स में शक्तिशाली मीडियम वेव्स ट्रांस मीटर लगाये हुये थे जो लन्दन के प्रोग्राम को रिले किया करते थे | रेडिओ सीलोन का लोकप्रिय प्रोग्राम बिनाका गीतमाला बेहद लोकप्रिय था और उसके ब्रॉडकास्टर अमीन सयानी उन दिनों देश का जाना -माना नाम था |दिल्ली के आसपास मीडियम वेव्स पर विविध भारती की विज्ञापन सेवा खासी लोक प्रिय थी | “ विविध भारती की विज्ञापन सेवा का ये दिल्ली केंद्र है मीडियम वेव 219 मीटर यानि कि एक हज़ार तीन सौ सत्तर किलो हर्ट्ज़ पर | “ दिल्ली A , दिल्ली B , दिल्ली c यानि विविध भारती दिल्ली d यानि युववाणी , इसके अलावा पकिस्तान और भारत में उर्दू सुनने वालों के लिए उर्दू सर्विस थी जो शोर्ट वेव्स पर थी किन्तु जालंधर स्थित ट्रांसमीटर उसे मीडियम वेव्स पर रिले किया जाता था "ये आल इंडिया रेडिओ की उर्दू सर्विस है " संबोधन होता था | जिस प्रकार विदेशों से भारत के लिए हिंदी और इंलिश में प्रसारण होते थे इसी प्रकार भारत से भी विदेशों के लिए भारतीयों के लिए हिंदी और तमिल व विदेशियों के लिए मुख्यत अंग्रेजी में विदेश प्रसारण हुआ करता था इसके लिए देश के सबसे पावरफुल शोर्ट वेव्स ट्रांसमीटर उतरप्रदेश के अलीगढ जिले में अनूपशहर रोड पर मंजूरगढ़ी के पास लगाए हुए हैं जिन्हें भारत में नहीं सुना जाता है |अलीगढ में ही कुछ स्थानों पर उन्हें सुन पाते हैं | वरना विदेशों में उन्हें साफ़ -साफ़ सूना जा सकता है | हम बचपन में अलीगढ में रहते थे तब वहीँ कुवार्सी-फार्म पर विदेश को होने वाले प्रसारण को एकदम साफ़-साफ़ सुन पाते थे मगर बुलंदशहर में अपने गाँव में नहीं| विदेश में रहने वाले भारतीय उन प्रोग्राम्स को सुना करते थे | गुरुवार को फरमाइश आधारित हिंदी फिल्मो का प्रसारण अफ्रीका यूरोप अमेरिका न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया आदि के लिए होता था जिसमें सचमुच में सर्वाधिक कर्णप्रिय गीत प्रसारित होते थे विविध भारती कि तरह नहीं जिसमें लगता था कि कुछ गीत जानबूझकर सुनाये जाते हैं या उपेक्षित किये जाते हैं  

बीबीसी स्पोर्ट्स स्टेशन को ढून्ढ कर मैंने रेडियो कमेंटरी सुनी थी | भारत ग्रुप बी में था | ग्रुप बी का पहला मुकाबला उलटफेर वाला रहा था जिसमें जिम्बाबे ने ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया था , दूसरा मैच भी उस वक्त के लिहाज से उलटफेर वाला था जिसमे भारत ने वेस्ट इंडीज को हराया जो तब तक के वर्ल्ड कप में उसकी पहली हार थी मतलब पहली बार किसी भी वर्ल्ड कप में वेस्ट इंडीज मैच हारी थी | मैं कुछ खुश किस्मत लोगों में हूँ जिन्होंने उस मैच की कमेंट्री सुनी है अगले मैच में भारत ने जिम्बाबे को हरा दिया | तीसरे मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को धो डाला | इसके अगले मैच में वेस्ट इंडीज ने भी को दुसरे वाले मैच में भारत को हरा दिया | अब भारत का मुकाबला दूसरी-दूसरी बार जिम्बाबे और ऑस्ट्रेलिया से होना शेष था | जिम्बाबे को हरा कर भारत आसानी से सेमी फाइनल में प्रवेश करने की तयारी में लग गया और उम्मीद थी कि भारत आसानी से एसा कर लेगा | अब तक भारत की सफलता को देखते हुए और भारत के लोगों में बढ़ गए जबरदस्त रोमांच को देखते हुए आकाशवाणी ने कमेंटरी की व्यवस्था कर दी थी और उस मैच की कमेंट्री आल इण्डिया रेडियो ने प्रसारित की | वो प्रसिद्द मैच आज भी चर्चित है भारत ने पहले बैटिंग शुरू की मगर ये क्या शुरू के कुछ ही ओवर में भारत की बुरी हालत हो गयी भारत के 5 धुरंधर खिलाड़ी 17 रन पर आउट हो गए | प्रशंसंको की साँसे अटक गयीं | लगने लगा कि अब आगे के सफ़र का मौक़ा ख़त्म होने वाला है ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत भी जिम्बाबे से हार जाएगा | आखिरी मैच ऑस्ट्रेलिया से है जिससे जीतने की संभावना बहुत कम थी | अब बैटिंग के लिए आये कप्तान कपिल देव इन्होने शुरू में संभल-संभल कर खेलना शुरू कर दिया | लंच के समय तक करीब 50 रन कपिल देव ने बनाये आल राउंडर रोजर बिन्नी और विकेटकीपर सय्यद किरमानी ने स्टैंडिंग दी | कपिल देव ने शतक मार दिया शतक पूरा करने के बाद तो कपिल देव असली कपिल देव बन गए और तांडव कर दिया चौको-छक्कों की बरसात लगा दी यादगार पारी नोट आउट 175 रन | उस वक्त के लोगों के रोमांच की आप कल्पना भी नहीं कर सकते हरेक बाल पर छक्का या चौका | भारत ने 8 विकेट पर कुल 266 रन बनाए | गावस्कर और श्रीकांत शून्य संदीप पाटिल 1 महेंद्र अमरनाथ 5 यशपाल शर्मा 9 पहले 5 धुरंधर थे इसके बाद बिन्नी 22 शास्त्री 1 किरमानी नॉट आउट 24 रन और कप्तान कपिल देव 138 बाल पर चौके छक्कों की बौछार पर 175 रन | उसके बाद जिम्बाबे भी 235 तक पहुंची | आशाओं के विपरीत आखरी मैच में भी भारत ने ऑस्ट्रेलिया को बुरी तरह से रौंद कर 118 से मैच जीता और शान से सेमी फाइनल में प्रवेश किया और फिर इंग्लैंड को सेमी फाइनल में हरा कर फाइनल में प्रवेश किया |

अब पूरा देश जाग उठा था जीतने की उम्मीद बढ़ चुकी थी | फाइनल की रेडियो पर ही कमेंटरी सुनी पहले भारत खेला | वेस्ट इंडीज ने भारत की बुरी गत बना दी | श्रीकांत के ही कुछ टुल्ले सेट हुए और भारत 183 पर आल आउट हो गया था | भारत में सन्नाटा छा गया था । लोग बेचैन और मायूस से हो गए थे । मगर पिक्चर अभी बाकि थी मेरे दोस्त , जून की गर्मियों की बात थी ।दूसरी पारी के वक़्त भारत में रात होनी शुरू हो चुकी थी । वेस्ट इंडीज ने अब खेलना शुरू किया तब रेडियो लेकर छत पर सोने चले गए जैसा कि गाँवों में होता था । कमेंटरी सुननी शुरू की | वेस्ट इंडीज ने ताबड़ तोड़ शुरुआत की | लग रहा था कुछ ही देर में फिर से वेस्ट इंडीज जीतने वाला है | पर विवियन रिचर्ड के आउट होने के बाद एकदम उत्साह बढ़ गया और फिर से मैच में रोमांच आ गया उम्मीदें और दिल की धड़कने बढ़ गयीं | उसी वक्त रेडियो के सेल वीक हो गए और फिर कमेंटरी नहीं सुन सका | खूब कोशिश की मगर रेडियो नहीं बजा | उधेड़ बुन में नींद आ गयी सुबह सवेरे उठा | मैं दौड़ लगाने जाता था | गाँव में बाहरी तरफ हमारा मकान है तब कोई मुझे कोई नहीं मिला जो रात का परिणाम बताये | आगे चला तो हमारे परिवार के ही “रन सिंह भैय्या “ जो डाक विभाग में थे सुबह की पहली बस से बुलंदशहर से आये थे मिले | उत्सुकता चरम पर थी मुझे मालूम था कि भैया को जरुर रिजल्ट मालूम होगा | मैंने भैया नमस्ते की | बड़े थे झिझक होती थी फिर भी पूछा “भैय्या रात मैच का क्या हुआ “ एकदम जबाव न देते हुए उन्होंने पूछा क्यूँ रेडियो नहीं सुना | मैंने कहा नहीं | ख़ुशी और नाखुशी के बीच मन अटका हुआ था | भैया ने जो हमसे काफी बड़े थे पर अपनों से छोटों को भी भैया ही कह कर सम्बोधित करते थे कहा “भैया रे भारत जीत गया वेस्ट इंडीज 140 पर आउट हो गयी “ ……..और भारत वर्ल्ड कप जीत गया |

 

लेखक परिचय :
नाम : विनोद कुमार सिरोही
परिचय : विनोद कुमार सिरोही यूपी के एक ऐसे पुलिस अधिकारी है, जो सर्विलांस के एक्सपर्ट माने जाते हैं। पुलिस विभाग में अपने फर्ज और कतर्व्य निर्वहन को लेकर विनोद कुमार सिरोही जितने आदर्श माने जाते हैं, उतनी ही इनकी लेखनी के भी लोग कायल है। विनोद कुमार सिरोही बेहद ही सटीक और उम्दा किस्म के लेखक है। उपरोक्त अंश उसकी फेसबुक वॉल से लिया गया है। 
फेसबुक लिंक : https://www.facebook.com/inspectorvinodsirohi

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