तेरा गम गम ही नही तेरी जफा है ए दोस्त!

तेरा गम गम ही नही तेरी जफा है ए दोस्त!

तेरा गम फिर भी मेरे गम की दवा है ए दोस्त!!

 

भूल कर तुझको मै जी लूं ये मेरे बस में नहीं!

मुझ को तसलीम मेरे ख्वाब मेरे दिल के अमीं!

मुझ को जीना है मगर दुनिया में जीने के लिये!

ज़ख्म लाचारें के बेचारों के सीने के लिये!

कितनी आँखें हैं जे हसरत से बुलाती हें मुझे!

आह मज़लूमों की रातों को रूलाती हैं मुझे!

 

कितने गम और तेरे गम के सिवा है मुझको!!

तेरा गम फिर भी मेरे गम की दवा है ए दोस्त!

 

ज़र्द चेहरें पे है दहषत की लकीरों का येजाल!

हर तरफ घूमते फिरते हुये अस्मत के दलाल !

आह रोते हुए बच्चे की तडपती हुयी माँ !

इन जवां चाँदनी रातों में ये ज़ुलमत के निशां!

क्या ये सब देखके मैं, चैन से जी सकता हूँ !

मए उल्फत क्या तेरी आंख से पी सकता हूँ !

 

क्या तेरे गम से बडे गम, ये मेरी जान नही?

तेरा गम फिर भी मेरे गम की दवा है ए दोस्त!

 

एक टीबी से सिसकते हुये शौहर की दवा को !

बेचा है यहां बीवी ने इज़्जत की कबा को !

बिकतें हैं यहां आज़ाये इन्सान मेरी जान !

दिल, गुदा,र् जिग़र, मानिन्दे सामान मेरी जान !

ये भूख में खूँ बेचती खामोश कतारें !

जाऊँ के ना जाँऊ ये अगर मुझ को पुकारें !

 

हक तेरे सिवा, इनका भी मुझ पर है मेरी जान!

तेरा गम गम ही नही तेरी जफा है ए दोस्त!

 

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परिचय :
नाम : साबिर अली ‘घानवी’
परिचय : साबिर अली यूपी के सहारनपुंर जिले के घाना खंडी के रहने वाले है। सन् 1969 में जन्मे साबिर अली पेषे से अध्यापक है। साबिर अली ने सन् 1990 से लेखन की दुनिया में कदम रखा। बिसरी यादें के नाम से धानवी साहब की किताब भी प्रकाषित हो चुकी है। उपरोक्त अंष उसकी किताब से     लिया गया है।

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फ़ोन नंबर : 09319628341

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