हापुड़ में मौत का पुल !

हापुड़ से सचिन कुमार की रिपोर्ट

केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार  प्रत्येक गांव को हाईवे से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना देने की कवायद कर रही है  लेकिन हापुड़ में अधिकारियों  की लापरवाही से ये योजना महज एक दिखावा साबित हो रही है । जी हां  दिल्ली से महज 45 किमी दूर एनसीआर से सटे यूपी के जनपद  हापुड़ में आज भी एक ऐसा गांव है जहां ग्रामीण, किसान, स्कूली बच्चे अपनी जान को खतरे  में डालकर  लकड़ी के जर-जर पुल को पार कर  शहर आते जाते है। ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों से लाख शिकायत के बाद भी इस लकड़ी के झूला पुल को ठीक नही कराया गया है। वाहनों  से ग्रामीणों को शहर जाने के लिए  12 किमी. का चक्कर काटना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया के इस काली नदी पर पुल बनाने के लिए वो  सिंचाई विभाग, जिला पंचायत औऱ ग्राम पंचायत से लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग तक फरियाद कर चुके है। लेकिन कोई भी विभाग काली नदी पर  पुल बनाने के लिए तैयार नहीं है। वहीं जब इस मामले में हापुड़ की मुख्य विकास अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आपके द्वारा ही मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है  जिसको हम जल्दी ही दिखवाकर इन ग्रामीणों की समस्या का समाधान किया जायेगा। आपको बता दे की थाना बाबूगढ़ के गांव  गजालपुर के लोगों को पांच साल पूर्व  जिला मुख्यालय हापुड़  आने के लिए खुद 70 हजार का चंदा एकत्र कर काली नदी पर लकड़ी का झूला पुल बनवाने  के लिए मजबूर होना पड़ा था। आज लकड़ी का ये  झूलापुल टूट चुका है  जिसके चलते करीब आधा दर्जन  गांवों के लोगों को जल्दी जिला मुख्यालय जाने के लिए इस मौत के पुल से जाना पड़ रहा है। बरहाल देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कब तक अमल में लाता है या फिर ग्रामीणों की मांग को अनसुना कर दिया जाएगा

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