केरल में NiPH वायरस से 11 लोगों की मौत

केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस (एनआईवी) से संक्रमित होकर 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इस जानलेवा वायरस से पीड़ित छह लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है, जबकि 25 प्रभावित सघन निगरानी में रखे गए हैं। जानवरों से फैलने वाला यह वायरस कोझिकोड में चमगादड़ के जरिये फैला है। फ्रूट बैट कहा जाने वाला चमगादड़ मुख्यत: फल या फल के रस का सेवन करता है। सूचना के बाद पूरा केरल हाई अलर्ट पर रखा गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने ब्लड सैंपल की जांच के बाद पुष्टि की है कि बुखार के कारण हुई चार में से तीन मौतों की वजह निपाह वायरस था। पहली मौत 19 मई को हुई थी।

राष्ट्रीय नियंत्रण केन्द्र (एनसीडीसी) के निदेशक की देखरेख में एक दल केरल पहुंच चुका है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केरल सरकार के स्वास्थ्य विभाग से बराबर संपर्क बनाये हुए है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस जानलेवा वायरस से पीड़ति छह लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है और 25 प्रभावितों को सघन निगरानी में रखा गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर हमला करता है। 20 साल पहले 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह का मामला सामने आया था। इसी वजह से इसे निपाह नाम दिया गया है। इस वायरस का पहला असर सुअरों में देखने को मिला था। इसके बाद 2004 में बांग्लादेश पर इसका प्रभाव दिखा था।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के डायरेक्टर के नेतृत्व में डॉक्टरों की हाई लेवल टीम भी केरल भेजी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केरल के स्वास्थ्य विभाग से लगातार संपर्क बनाए हुए है।

इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।

इस बीमारी से बचने के लिए खजूर, उसके पेड़ से निकले रस और पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर, घोड़ों और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com