2019 की तैयारी उद्धव ठाकरे से मिले अमित शाह

सहयोगीयों को मनाने की राह पर चल पड़े भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह की संपर्क फॉर समर्थन यात्रा का पहला पड़ाव बेहद कठिन होने बाला है। अमित शाह बुधवार को मुंबई में उद्धव ठाकरे मिले इससे पहले ही शिवसेना ने बीजेपी पर हमला बोल दिया।

पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में बीजेपी पर तीखे हमले किए गए हैं और दोहराया है कि 2019 के चुनाव पार्टी अकेले लड़ेगी। शिवसेना ने बीजेपी पर पालघर में हुए उपचुनाव साम-दाम-दंड-भेद से जीतने का आरोप लगाते हुए उसे किसानों और पेट्रोल के बढ़ते दामों जैसे मुद्दों पर घेरा है। इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत पहले कह चुके हैं कि मेहमान का स्वागत करना मातोश्री की परंपरा है लेकिन इस मुलाकात के लिए शिवसेना का अपना कोई अजेंडा नहीं है। उद्धव की शिकायत रही है कि बीजेपी सत्ता पाते ही शिवसेना के अहसानों को भूल गई है। 
आपको बता दें कि खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की तरफ से पतंजलि को दो बार 6-6 महीने का एक्सटेंशन मिल चुका था लेकिन यूपी सरकार की तरफ से मामला लटकाया जाता रहा.
 

रामदेव की कंपनी पतंजलि ने योगी सरकार के इस फैसले पर निशाना भी साधा था. पतंजलि ने आरोप लगाया था, "पतंजलि हर्बल एंड मेगा फ़ूड पार्क" नाम के टाइटल को एनओसी देने के नाम पर योगी सरकार एक साल से ज्यादा समय से टालमटोल कर रही है, जिससे नाराज होकर अब पतंजलि ने फूड पार्क को यूपी से बाहर कहीं शिफ्ट करने का निर्णय लिया है

पार्टी ने बीजेपी पर पेट्रोल की कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने और किसानों की हड़ताल को लेकर हमला किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार पालघर की तरह ही साम-दाम-दंड-भेद से किसानों की हड़ताल तोड़ने की कोशिश कर रही है। आरोप लगाया है कि ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी दुनिया और शाह देश में संपर्क मुहिम चला रहा हैं। 

'सामना' में बिहार में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड गठबंधन के हनीमून को खत्म होता बताया गया है। पार्टी लीडर केसी त्यागी का कहना है कि बीजेपी को मित्रों की चिंता नहीं है, जबकि नीतीश कुमार खुद नोटबंदी को लेकर राग बदलने लगे हैं। 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू  की तेलुगु देशम पार्टी के एनडीए से अलगाव, राजस्थान और मध्यप्रदेश में परिवर्तन की हवा के सहारे शिवसेना ने बीजेपी के लिए 2019 तक स्थिति मुश्कल होने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि संपर्क अभियान के पीछे 2019 चुनाव एक वजह हो सकती है लेकिन सच यह है कि सत्ताधारी दल का जनाधार टूट गया है। 

राज्य में अपनी-अपनी ताकत बढ़ाने के लिए दोनों पार्टियों में 2014 के बाद से जो प्रतिस्पर्धा शुरू हुई है, वह 2018 में प्रतिद्वंद्विता तक आ पहुंची है। पालघर सीट के लिए लोकसभा के उपचुनाव में यह साफ नजर आया। बीजेपी काफी कोशिश करके ही यह सीट जीत सकी। 

80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश के बाद 48 सीटों वाला महाराष्ट्र दूसरा सबसे बड़ा प्रदेश है। 2014 के आम चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश में ज्यादातर उपचुनाव हार चुकी बीजेपी को 2019 में उत्तर प्रदेश से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं, क्योंकि वहां सपा-बीएसपी और कांग्रेस का गठबंधन उसका खेल खराब करने की ताकत रखता है। इसीलिए बीजेपी का सारा जोर महाराष्ट्र पर है। 

 

 

 

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