कैराना उपचुनाव से पहले रालोद को बड़ा झटका, पूर्व विधायक साहब सिंह ने थामा बीजेपी का दामन

कैराना की लड़ाई हर कीमत पर जीतने की कोशिश में जुटी भाजपा की कोशिश विपक्षी खेमे के असंतुष्टों को अपने साथ लाकर चुनावी गणित दुरुस्त करने की है। इस कड़ी में कैराना सहित पश्चिमी उप्र के रालोद और सपा में सक्रिय कुछ बड़े जाट नेताओं को भाजपा में लाया जा रहा है।शुक्रवार को इसकी शुरुआत रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी साहब सिंह के भाजपा में शामिल होने से हुई। बागपत के रहने वाले पूर्व विधायक और अखिलेश सरकार में पशुधन विकास विभाग के सलाहकार रहे साहब सिंह समेत संभल के बसपा नेता चरण सिंह भारती जाटव और मुरादाबाद के रजनीकान्त जाटव ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।

साहब सिंह के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को जबरदस्त झटका लगा है. कैराना उपचुनाव से पहले बीजेपी के द्वारा खेले गए इस चुनावी पासे ने विपक्ष की परेशानी को बढ़ा दिया है. बीजेपी के रणनीतिकार कैराना में समाजवादी पार्टी के नेता को ही राष्ट्रीय लोकदल से खड़ा करने और उपचुनाव में दोनों ही सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारने से बने समीकरण को अपने पक्ष में करने के मूड में हैं.


भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय साहब सिंह ने इन नेताओं क साथ-साथ लगभग 60-70 लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इससे पहले बृहस्पतिवार को उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की थी। सपा और रालोद के गठबंधन के लिए ये बड़ा झटका बताया जा रहा है।

दरअसल, भाजपा के रणनीतिकार कैराना में सपा के नेता को ही रालोद से खड़ा कर देने और उपचुनाव में दोनों ही जगह मुस्लिम उम्मीदवार उतारने से बने समीकरण व नाराजगी को अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चाहते हैं।

भाजपा की निगाह पश्चिम के कुछ प्रमुख जाट चेहरों सहित अन्य प्रभावशाली नेताओं पर है ताकि इन्हें पार्टी में लाकर यह संदेश दिया जा सके कि पश्चिम में जाट सहित अन्य समाज के लोगों का समर्थन अभी भाजपा के साथ ही है। इसके अलावा यह भी संदेश दिया जा सके कि मुजफ्फरनगर दंगे और कैराना के पलायन मुद्दे को लोग भूले नहीं हैं। यह कहना भी गलत है कि पश्चिम के लोग भाजपा से छिटक रहे हैं।

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