आखिरकार 22 साल बाद टोक्यो सब-वे सरीन गैस हमले के पीड़ितों को मिला इंसाफ, शोको असहारा और उसके छह अनुयायियों को सुनाई गई फांसी की सजा

जापान में 1984 में एक ओम शिनरिकयो के नाम से एक धार्मिक संगठन बना. जापानी तेजी से इसके सदस्य बनने लगे. इसमें पढ़े-लिखे जापानी ज्यादा थे. इस संगठन को खड़ा करने वाला बाबा का नाम था शोको असहारा. वो अंधा था. खुद को क्राइस्ट और भगवान का दूत बताता था. अपने संगठन की महिलाओं से संबंध बनाने के बाद उनके बाल काटकर छोटी शीशियों में रख लेता था. विरोध करने वालों को मौत के घाट उतरवा देता था. ये बाबा छह जुलाई को फांसी पर चढ़ा दिया गया.
आखिरकार 22 साल बाद टोक्यो सब-वे सरीन गैस हमले के पीड़ितों को इंसाफ मिला। शुक्रवार को 1995 में हुए इस दिल दहला देने वाले हमले के मास्टर माइंड शोको असहारा और उसके छह अनुयायियों को फांसी की सजा सुनाई गई। वर्षों से टोक्यो के लोग इन दिन का इंतजार कर रहे थे, जिन्होंने इस हमले में अपनों को खो दिया। पिछले 23 साल से उस दर्द को सीने में दबाए इन लोगों के चेहरे नम आंखों के साथ आज खुशी से खिल उठे। 

इस बीच कानून मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'सात अम शिनरिक्यो पंथ के सदस्यों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई, जिसमें शोको असहारा भी शामिल है।' बता दें कि नर्व एजेंट हमले मामले में फांसी की यह पहली सजा है। अभी इस पंथ के छह और सदस्यों की सजा पर फैसला आना बाकी है।

63 वर्षीय चीजो मत्सुमोतो उर्फ शोको असहारा को आज फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। वो पिछले 14 वर्षों से मृत्युदंड की सजा की कतार में था। हालांकि अन्य दोषी अनुयायियों को कब फांसी पर लटाकाया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बता दें कि सरीन गैस हमले में दोषी पाए जाने के बाद 2004 में  शोको असहारा को मौत की सजा सुनाई गई थी।

लंबे बाल और दाढ़ी वाला 'अम शिनरिक्यो' पंथ का संस्थापक शोको असहारा का असली नाम 'चीजो मत्सुमोतो' है। वह पिछले 22 साल से जेल में बंद था। अपने प्रशंसकों को लुभाने के लिए वह चमत्कारों और रहस्यवाद के मिश्रण का सहारा लिया करता था। एक वक्त था जब उसके करीब 10 हजार से भी अधिक अनुयायी थे, इनमें से कई 1995 के टोक्यो सब-वे पर हुए सरीन गैस हमले में शामिल थे। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि हजारों लोग घायल हो गए थे।

1995 का वो दिन आज भी कोई नहीं भूल सकते अचानक कुछ लोग मास्क पहने अंडर-वे में दाखिल हुए. उनके हाथों में जहरीली गैस सरीन के सिलिंडर थे. उन्होंने भीड़भाड़ वाले अंडर-वे पर लोगों पर ये गैस स्प्रे की. गैस के रिसाव से दर्जनों लोग मारे गए, जबकि बड़े पैमाने पर लोग बीमार हो गए. ये कांड इसी बाबा के दिमाग की उपज थी. बाद में एक साल बाद जब उसे गिरफ्तार किया गया, तो उसने कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार वो नहीं बल्कि भगवान हैं, जिन्होंने उसे ऐसा करने का निर्देश दिया था.
सरीन गैस से हमले के बाद लोग चिल्ला रहे थे। हर तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। प्लेटफॉर्म पर लोग इधर-उधर भाग रहे थे।  यात्री उल्टियां कर रहे थे। खांसी और सांस लेने में उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा था। एम्बुलेंस में लदे लोग चिल्ला रहे थे। प्रभावित लोगों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टरों को सड़कों पर उतारना पड़ा। घायलों की सहायता और जहर के प्रभाव को रोकने के लिए जापान की सेल्फ डिफेंस फोर्स को लगाया गया था, घायलों को गैस मास्क दिया गया ताकि वे जहर के प्रभाव से बच सके। 

शोको की उम्र 63 साल थी. एक गरीब परिवार पैदा शोका की बाईं आंख की रोशनी बचपन में ही ग्लूकोमा से चली गई. दाईं आंख से कम दिखता था. उसने ब्लाइंड स्कूल में दाखिला लिया. उसे ऐसे बच्चों में गिना जाता था, जो बच्चों को धमकाता और पैसे वसूल करता था इस बीच कानून मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'सात अम शिनरिक्यो पंथ के सदस्यों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई, जिसमें शोको असहारा भी शामिल है।' बता दें कि नर्व एजेंट हमले मामले में फांसी की यह पहली सजा है। अभी इस पंथ के छह और सदस्यों की सजा पर फैसला आना बाकी है।

63 वर्षीय चीजो मत्सुमोतो उर्फ शोको असहारा को आज फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। वो पिछले 14 वर्षों से मृत्युदंड की सजा की कतार में था। हालांकि अन्य दोषी अनुयायियों को कब फांसी पर लटाकाया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बता दें कि सरीन गैस हमले में दोषी पाए जाने के बाद 2004 में  शोको असहारा को मौत की सजा सुनाई गई थी।

लंबे बाल और दाढ़ी वाला 'अम शिनरिक्यो' पंथ का संस्थापक शोको असहारा का असली नाम 'चीजो मत्सुमोतो' है। वह पिछले 22 साल से जेल में बंद था। अपने प्रशंसकों को लुभाने के लिए वह चमत्कारों और रहस्यवाद के मिश्रण का सहारा लिया करता था। एक वक्त था जब उसके करीब 10 हजार से भी अधिक अनुयायी थे, इनमें से कई 1995 के टोक्यो सब-वे पर हुए सरीन गैस हमले में शामिल थे। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि हजारों लोग घायल हो गए थे।

उस दिन जहरीली सरीन गैस को तरल रूप में पांच सब-वे बोगियों में अलग-अलग जगह फेंका गया था। सरीन को लेकर असहारा पर एक सनक सवार थी, जो सनक पागलपन में बदलती जा रही थी। उसे डर था कि उसके दुश्मन सरीन से उसपर हमला करेंगे। इस हमले के बाद उसे माउंट फुजी इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया था। 

आपको जानकर शायद हैरानी होगी शोको असहारा करीब-करीब अंधा था, लेकिन वो कमाल का वक्ता का था। 1984 में उसने डूम्सडे पंथ की स्थापना की। उसकी छवि ऐसी करिश्माई थी कि लोग उसके पंथ की तरफ आकर्षित होते चले गए। यहां तक कि शिक्षित लोग, डॉक्टर और वैज्ञानिक तक उसके पंथ में शामिल हो गए थे। कहा जाता है कि वह ब्रेनवॉश करने में माहिर था। उसने उन युवाओं को प्रलोभन दिया, जिन्हें जापानी समाज में खालीपन महसूस होता था और ऐसे करके धीरे-धीरे उसने अपना एक साम्राज्य खड़ा कर दिया।

असहारा ने अपने अनुयायियों को बताया कि वह उन्हें उचित प्रशिक्षण देगा और भगवान की शक्ति हासिल करने में उनकी मदद करेगा। वो कहता था कि वे 1997 में आर्मागेडन (अच्छी और बुरी शक्ति के बीच अंतिम युद्ध) के बाद एक नई दुनिया बसाएंगे। हालांकि हमेशा से ही इस पंथ को लेकर जापान में शंका थी, लेकिन इस हमले के बाद पंथ के मुख्यालय पर कड़ी कार्रवाई हुई और शोको व उसके समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

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