खुफिया एजेंसियों के अलर्ट के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के लिए दिए नए दिशा-निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश का खुलासा होने के बाद उनकी सुरक्षा में कई बदलाव किए गए हैं। उन्हें इसके लिए स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) से इजाजत लेनी होगी। एसपीजी जरूरत महसूस होने पर मंत्रियों और अधिकारियों की तलाशी भी ले सकता है। दरअसल, पीएम मोदी पर गुमनाम खतरे का जिक्र करते हुए गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके तहत पीएम की सुरक्षा को और सख्त किया गया है। 

गृह मंत्रालय ने कहा है कि पीएम पर अब तक का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। माना जा रहा है कि एसपीजी ने पीएम को कम से कम रोड शो करने की सलाह दी है क्योंकि सुरक्षा के लिहाज से जनसभाएं ज्यादा सुरक्षित होती हैं। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि पीएम मोदी 2019 चुनाव के स्टार प्रचारक होंगे। लिहाजा, वह हत्यारों के निशाने पर नंबर वन की श्रेणी में हैं। 

1981 से पहले तक भारत के प्रधानमंत्री और उनके आवास के सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस उपायुक्त के नेतृत्व वाली स्पेशल सिक्योरिटी  के हाथों में होती थी। अक्टूबर 1981 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के कहने पर एक स्पेशल टास्क फोर्स का निर्माण किया गया। जो दिल्ली के अंदर और बाहर पीएम को सुरक्षा मुहैया करवाते थे। अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सुरक्षा गार्ड्स ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद पीएम की सुरक्षा को लेकर रिव्यू किया गया।
पीएम की सुरक्षा में तैनात होने वाले एसपीजी कमांडो को विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें पीएम की सुरक्षा में तैनात करने से पहले उनके बारे में सारी जानकारी निकाली जाती है। जैसे कि वह कहां जाते हैं, किससे मिलते हैं आदि। उनके परिवार के सभी सदस्यों को ब्यौरा भी सरकार के पास मौजूद होता है। इन कमांडो के पास एफएनएफ-2000 असॉल्ट राइफल होती है। यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक गन है। कमांडोज के पास ग्लोक 17 नाम की एक पिस्टल भी होती है। कमांडो अपनी सेफ्टी के लिए एक लाइट वेट बुलेटप्रूफ जैकेट पहनते हैं और साथी कमांडो से बात करने के लिए कान में लगे ईयरप्लग या फिर वॉकी टॉकी की मदद लेते हैं।

पुणे पुलिस ने 7 जून, 2018 को अदालत में कहा था कि प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) से जुड़े पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद इनमें से एक के दिल्ली आवास से एक पत्र मिला था। इसमें मोदी की पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तर्ज पर हत्या करने की साजिश का जिक्र था। हाल में मोदी के पश्चिम बंगाल दौरे में एक व्यक्ति सात सुरक्षा घेरे तोड़ते हुए उनके नजदीक पहुंच गया था। 

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पीएम की सुरक्षा की समीक्षा के लिए एनएसए अजीत डोभाल, गृह सचिव राजीव गाबा, खुफिया ब्यूरो प्रमुख राजीव जैन के साथ बैठक की। गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि पीएम के सुरक्षा इंतजाम में मजबूती के लिए सभी एजेंसियां मिलकर जरूरी कदम उठाएं।

छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे माओवाद प्रभावित राज्यों को संवेदनशील घोषित कर दिया है। इनके पुलिस प्रमुखों को उनके राज्यों में पीएम की यात्रा के दौरान अतिरिक्त चौकसी बरतने को कहा गया है। सुरक्षा एजेंसियां केरल के चरमपंथी संगठन पीएफआई पर नजर रख रही हैं।  यह किसी भी तरह के रासायनिक या जैविक हमले का जवाब देने में सक्षम होते हैं।

 

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