झारखंड के खूंटी से अगवा हुए तीनों जवानों का अबतक नहीं लगा कोई सुराग

झारखंड के खूंटी के घाघरा गांव से अगवा हुए तीनों जवानों का अबतक कुछ पता नहीं चल पाया। घाघरा गांव में सुबह से ही तनाव का माहौल है. जैसे ही रैप के जवान घाघरा गांव पहुंचे , ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगमा को बढ़ते देख पुलिस ने रबर बुलेट और आंसूगैस के गोले भी छोड़े। गांव में पुलिस ने सैकड़ों लोगों को एक जगह बैठा रखा है। कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि अगवा . उधर, अगवा तीनों जवान अभी तक पथलगड़ी समर्थकों के कब्जे में हैं। अगवा पुलिसकर्मियों में सुबोध कुजूर, विनोद केरकेट्टा और सियोन सुरीन शामिल हैं। हमलावरों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। बताते चलें की पत्थलगड़ी समर्थकों ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के सांसद करिया मुंडा के तीन अंगरक्षकों का अपहरण कर लिया था. 

दरअसल इस हमले से पहले खूंटी गैंगरेप के आरोपियों पर कार्रवाई करने गई पुलिस फोर्स से पत्थलगड़ी समर्थकों का जमकर टकराव हुआ। जिसमें एक जवान की एके-47 लेकर एक पत्थलगड़ी समर्थक भाग गया। उसके बाद पुलिसकर्मियों को खदेड़ते हुए पत्थलगड़ी समर्थक सांसद के आवास तक पहुंच गए। इस दौरान लाठीचार्ज करने वाला एक सिपाही दौड़ते हुए उनके घर की तरफ आया। उसे खोजते हुए पत्थलगड़ी समर्थक उनके घर में घुस आए और हमला बोल दिया।

वहीं जानकारी के मुताबिक खूंटी डीसी सूरज कुमार और एसपी अश्विनी सिन्हा सुबह से शाम तक हर मोर्चे पर तैनात रहे। ठोस कार्रवाई न करने की हिदायत के बावजूद वे ग्रामीणों के सामने रात भर डटे रहे। रात 2 बजे के करीब उन्हें ये आदेश दिया कि सुबह अतिरिक्त पुलिस दस्ते के पहुंचने के बाद ही कोई कार्रवाई करना है। बताया जाता है कि सुबह कार्रवाई करने सैकड़ों की संख्या में पुलिस जवान खूंटी के लिए रवाना हो चुके हैं। जिस समय हमला हुआ मुंडा और उनके दोनों बेटे जगन्नाथ मुंडा और अमरनाथ मुंडा दिल्ली में थे।

खूंटी इलाके के मदरूडीह, घाघरा, कुदाडीह और मदगड़ा गांव में पहले से ही पत्थलगड़ी की योजना थी। मंगलवार सुबह चार गांवों के सैकड़ों लोग जुटे। पुलिस को खूंटी गैंगरेप के मास्टरमाइंड माने जा रहे जॉन जुनास तिड़ू और पत्थलगड़ी नेता जोसेफ पूर्ति समेत अन्य के यहां होने की सूचना मिली। करीब 350 पुलिसकर्मी मदरूडीह गांव में घुस गए। ग्रामीणों ने विरोध करते हुए पूछा कि जब यहां कोई दुष्कर्म नहीं हुआ तो इतनी बड़ी संख्या में पुलिस क्यों पहुंची? इस दौरान सभी ग्रामीण हथियारों से लैस थे। वे उग्र हो गए और पत्थलगड़ी स्थल से पुलिसकर्मियों को खदेड़ते हुए करीब तीन किलोमीटर दूर अनिगड़ा ले गए। पुलिस ने एक बार फिर मोर्चा संभाला और ग्रामीणों को लौटने की हिदायत दी, लेकिन वे नहीं माने। झड़प हुई तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके बाद कई गांवों से लोग बड़ी संख्या में एकजुट हो गए और पुलिस टीम को घेर लिया।

सांसद के आवास से अगवा किए गए तीन हाउस गार्ड्स में सुबोध कुजूर, विनोद केरकेट्‌टा और सिमोन सुरीन शामिल हैं। बॉडीगार्ड बैजू उरांव किसी तरह वहां से भागने में कामयाब रहा। पत्थलगड़ी समर्थकों ने तीन गार्डों को छोड़ने के लिए शर्त रखी कि खूंटी डीसी और एसपी समेत सिर्फ 5 लोग ही आकर उनसे बातचीत करें। ऐसे में आशंका थी कि वे उन्हें भी बंधक बना लेंगे। इसलिए उनकी शर्त नहीं मानी गई, लेकिन पूरी फोर्स देर रात तक इस बात पर अड़ी है कि अगवा किए गए तीन गार्डों को साथ लिए बिना वह वापस नहीं लौटेंगे।

पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा है, जिसके जरिए से गांव का सीमांकन किया जाता है, लेकिन अब इसी की आड़ में गांव के बाहर अवैध ढंग से पत्थलगड़ी की जा रही है। पत्थर पर ग्राम सभा का अधिकार दिलाने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों (आर्टिकल) की गलत व्याख्या करते हुए ग्रामीणों को आंदोलन के लिए उकसाया जा रहा है।

मंगलवार को खूंटी प्रखंड के ही घाघरा गांव में पत्थलगड़ी होने वाली थी। इस कार्यक्रम में पत्थलगड़ी समर्थकों के नेता युसुफ पूर्ति और जॉन जुनास तिड़ू को भी भाग लेना था। इस कार्यक्रम को रोकने और दोनों नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस घाघरा की तरफ रवाना हुई। बीच रास्ते में कड़िया मुंडा का गांव चांडडीह है। वहीं पुलिस की पत्थलगड़ी समर्थकों से भिड़ंत हो गई। पुलिस ने समर्थकों को वापस लौट जाने के लिए कहा, लेकिन समर्थक अड़ गये। जब मान-मनौव्वल काम नहीं आया, तो पुलिस ने पत्थलगड़ी समर्थकों पर लाठी चार्ज कर उन्हें तितर-बितर कर दिया। इसके बाद पुलिस वापस खूंटी लौट आई। इधर वहां पत्थलगड़ी समर्थक फिर से जुटे। वहां उन्हें पता चला कि लाठी चार्ज करने वाला एक पुलिसकर्मी कड़िया मुंडा के घर आया है। उसे खोजते हुए पत्थलगड़ी समर्थक कड़िया मुंडा के आवास पर पहुंचे। इसके बाद वे लोग वहां तैनात पुलिस के जवानों को घसीटते हुए लेकर चले गये।  पत्थलगड़ी समर्थकों के नेता युसुफ पूर्ति से इस मामले में पूछे जाने पर कहा कि वे जवान सुरक्षित हैं और उन्हें ग्रामसभा ने अपनी कस्टडी में लिया है। 

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