हिंदू-मुस्लिम एकता की एक ओर मिसाल !

बढ़ते हैं अगली खबर की ओर जो आपको इंसानियत का आइना दिखाएगी। कहते हैं इंसानियत से बड़ा धर्म कोई नहीं होता है। वैसे इस पर अमल करने वाले लोग विरले ही मिलते हैं। ऐसा ही एक मामला बिहार के भोजपुर जिले में सामने आया है। यहां आपके अपने चैनल समाचार टुडे के संवाददाता विक्रांत राय ने एबी निगेटिव खून के लिए परेशान मुस्लिम महिला को अपना खून देकर उसकी जान बचाई। बताया जाता है कि भोजपुर जिले के चांदी थाना क्षेत्र के भदवर गांव निवासी एमएस जमा की पत्नी शायरा बानो रोजा के दौरान बीमार पड़ गई थी। परिजनों ने उन्हें आरापटना बाइपास स्थित धनुपरा के पास एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। इस दौरान खून की कमी होने पर डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल खून चढ़ाने की सलाह दी थी। लेकिन समस्या यह थी कि शायरा का ब्लड ग्रप AB निगेटिव था और इस ग्रुप का कोई रक्तदाता मिल नहीं रहा था। परिवार के लोगों को समझ में नहीं रहा था कि वे क्या करें।

परिवार वालों ने सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर ब्लड ग्रुप का जिक्र करते हुए खून के लिए लोगों से मदद मांगी। विक्रांत ने भी फेसबुक पर इस संदेश को पढ़ा। इत्तेफाक से उनका ब्लड ग्रुप भी AB निगेटिव था। उन्होंने तुरंत ही फेसबुक चैट के माध्यम से परिवार से संपर्क साधा और खून देने के लिए ब्लड बैंक पहुंच गये। इस तरह शायरा की जान बच गई। आज शायरा का परिवार विक्रांत का शुक्रिया अदा कर रहा है।

समाचार टुडे के संवाददाता विक्रांत राय ,परेशान मुस्लिम महिला को अपना ब्लड देते हुए

केवल शायरा का परिवार विक्रांत की तारीफ कर रहा है। बल्कि विक्रांत के इस नेक काम की चर्चा हर हो रही है। कोई इसे क़ौमी एकता की मिसाल बता रहा है तो कोई इसे पत्रकारिता धर्म का निर्वाहलेकिन विक्रांत कहते हैं कि उन्होंने केवल इंसानियत का धर्म निभाया है। अगर भविष्य में भी उनके खून से किसी की जान बचती है तो वे खून देने के लिए हर वक्त तैयार रहेंगे।

विक्रांत ने जो किया है उसके बारे में मशहूर कवि गोपाल प्रसाद व्यास की एक प्रसिद्ध कविता को थोड़ा बदल कर इस तरह कहा जा सकता है कि वह खून कहो किस मतलब का सके जो लोगों के काम नहीं, वह खून कहो किस मतलब काजिसमें जीवन रवानी हैजो अपने लिए ही बहता है वह खून नहीं हैपानी है।

 

समाचार टुडे के लिए रितेश झा की रिपोर्ट

 

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