ANALYSIS: शूट आउट एट घासीपुराः विरोध नहीं… एनकाउंटर का सच जानना चाहते हैं सब !

'अपराध का खात्मा तो अपराधी खुद-बा-खुद खत्म !
इंसानों का लहू बहाना तो वो भी बाखूबी जानते थे !!'

अमित सैनी की कलम से…
मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर के घासीपुरा में तथाकथित पुलिस एनकाउंटर के दौरान मारे गए तीनों लोग शातिर किस्म के अपराधी थे… ये तो पक्का है। आज नहीं तो कल… उन्हें सजा भी मिलनी ही थी। हो सकता है कि जो अंजाम उनका अब हुआ है, क्या पता भविष्य में उनका खात्मा इससे भी भयनाक तरीके से होता? इन्हें जो सजा मिली…. किस्मत ने ये ही उनके लिए मुकरर्र की हुई थी या फिर अदालत इन्हें कोई और सजा सुनाती…. ये तो वो आने वाला वक्त ही बताता…. जो अभी कभी नहीं आने वाला…. लेकिन जिस तरह से तीनों का खात्मा किया गया है और एक अंधेरी चादर उनकी मौत पर डालकर रहस्यमयी बना दी गई है…. सब ये ही चाहते है कि कम से कम उन्हें ऑफिषियली ही नहीं…. अनऑफिषियली तरीके से ही पूरी कहानी पता चल जाए….. !!
 

विरोध मकसद नहीं, जानकारी चाहिए !
बदमाषों के खात्मे का विरोध कोई नहीं कर रहा है…. सिवाय… उनके परिजनों और कुछेक लाभ/मौका परस्त लोगों के….. आम से लेकर खास बस सच्चाई जानने के लिए उत्सुक है। पुलिस की बेमेल थ्योरी को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब लोग जानना चाहते हैं। पुलिस की बंदूक से गोली भी चली… निषाना भी चूक गया…. बदमाषों को पुलिस की गोली भी नहीं लगी और वो फिर भी ढे़र हो गए?? ये कैसे हुआ…. जनता-जर्नादन ये जानना चाहती है। रोजमर्रा की अपराधिक वारदातों से आजीज आ चुकी जनता के लिए तो ये खुशी की बात है बदमाश मारे गए हैं, लेकिन हर किसी का बस एक ही सवाल है….. कैसे मारे गए ?? 
 

सीना छलनी करने के बजाए खोपड़ी उड़ाना आसान !
जांच तो हमने भी तमाम देखी है….. पिछले कई सालों से ये ही सब देखता आ रहा हूं….. बात सिर्फ ये है कि पता चलना चाहिए… सच्चाई से पर्दा उठना चाहिए कि आखिर हुआ क्या था? पुलिस की गोली से तो वो मरे नहीं? खुद गोली मारी और वो भी सीने से सटकर…. मैं कतई नहीं मानता…. 98/99 फीसदी लोग कनपटी पर गोली मारकर खुदकुषी करते हैं। बहुत कम ऐसे मामले सामने आते हैं….जब कोई सीने पर रखकर गोली चलाए… क्योंकि ये इतना भी आसान नहीं होता। कम से कम खोपड़ी में सटाकर गोली मारने से तो आसान है ही नहीं! 
 

… और एक साथ उड़ गए तीनों के प्राण पंखेरू ?
मुझे नहीं लगता कि वो इतने समझदार थे कि वो जान बूझकर ऐसा कुछ कर गए कि सब उलझे रह जाए। यानि उन्होंने एक-दूसरे के सीने पर पिस्टल अथवा तमंचा सटाया और 10 से उल्टी गिनती षुरू कर दी कि… 10…9….8…7…6…5…4…3…2…1… और खल्लास….तीनों ने एक साथ ट्रेगर दबा दिया …. और एक साथ तीनों के प्राण पंखेरू उड़ गए।

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