19 बरस की बाली उम्र में अंकिता ने लिख दी ‘दास्तान-ए-ज़िंदगी’

हिंदी साहित्य की उभरी लेखिका अंकिता सोनी ने अपनी किताब " दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी " से सिद्ध कर दिया कि उम्र… समाज के नियम आदि किसी की प्रतिभा को निखरने में कभी बाधक नहीं बन सकती। हिंदी के श्रुत विद्वानों ने "दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी" पुस्तक का विमोचन कर लेखिका अंकिता सोनी की रचनात्मतक सोच को स्मृति चिन्ह से नवाज कर सम्मानित किया। लेखक और लेखिका तो बहुत हुए इस पुण्य भारतभूमि पर…. कोई ऐसी लेखिका नहीं हुई जिसने मात्र 19  साल की उम्र में किताब लिख दी हो।
सुविख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की 109 वीं जयंती के मौके पर परिचर्चा  'नवीन भारत में हिंदी' कार्यक्रम आयोजित कर लोगों ने उनको याद किया। राजधानी दिल्ली के रफ़ी मार्ग स्थित कंस्टीटूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत हुई। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के तैलचित्र पर फूल-माला चढ़ाकर मुख्य अतिथि और लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया।  हिन्दी संस्कृति संस्था के अध्यक्ष आदरणीय संदीप ठाकुर, गंगाराम अस्पताल के सीनियर चिकित्सक डॉ सुरेश सिंगवी, कार्गो इंडिया के चेयरमैन दिनकर, पेट्रोलियम विश्वविद्यालय देहरादून के सलाहकार महेंद्र कुमार गोयल, कमल संदेश के कार्यकारी संपादक डॉ शिवशक्ति बक्शी, निर्भया ज्योति ट्रस्ट के सचिव सर्वेश तिवारी एवं हंसराज महाविद्यालय दिल्ली की प्राचार्य डॉ रमा शर्मा जैसे महानुभावों ने कार्यक्रम में आकर राष्ट्रकवि दिनकर को उनकी रचनाओं और हिंदी साहित्य में योगदान के लिए याद किया। वीणा वादनी माँ सरस्वती की आराधना करते हुए संगीतकार धीरजकांत और तबला वादक रवीश कुमार ने शमा में चार चांद लगा दिये। कविताओं से भारतीय समाज का रिश्ता सदियों पुराना है। अगर बात ऐसे कवियों की हो जिन्होंने आजादी की लड़ाई से लेकर उसके बाद तक अपनी लेखनी से जनता को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक किया हो तो उनमें रामधारी सिंह दिनकर का नाम जरूर आता है।
 
 
आज इन्ही की हिंदी साहित्य धरोहर को हमारे बीच एक नयी उभरी लेखिका अंकिता सोनी ने अपनी किताब " दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी " से सिद्ध कर दिया कि उम्र… समाज के नियम आदि किसी की प्रतिभा को निखरने में कभी बाधक नहीं बन सकती। हिंदी के श्रुत विद्वानों ने "दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी" पुस्तक का विमोचन कर लेखिका अंकिता सोनी की रचनात्मतक सोच को स्मृति चिन्ह से नवाज कर सम्मानित किया। लेखक और लेखिका तो बहुत हुए इस पुण्य भारतभूमि पर…. कोई ऐसी लेखिका नहीं हुई जिसने मात्र 19  साल की उम्र में किताब लिख दी हो। यह बात ही अपने आप में निराली है कि उस बालिका की सोच की अंतरिम सीमा कितनी होगी। लेखिका अंकिता सोनी को जब उनकी पुस्तक का विवरण करने के लिए कहा गया तो उन्होंने अपने विचारो में कहा कि समाज की बेड़ियों और अन्धविश्वासों से ऊपर उठकर नवीन भारत में हिंदी को शिखर का हिंदुस्तान बनाना है। साथ ही उन्होंने दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी किताब का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज हमारा भारत ऐसा बन गया है जहां लोग परेशानियों से हारकर ज़िन्दगी से मुँह मोड़ लेते है और पूरी दुनिया आज खुशियों से ज़्यादा पैसों की होड़ में शामिल है। लेखिका अंकिता सोनी ने साथ ही हिंदी संस्कृति की आज के युग में स्थिति पर भी चर्चा की।
 
 
लेखिका अंकिता सोनी "दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी " पुस्तक के माध्यम से जीवन और मृत्यु के भवर में फसें मुसाफिरों को फिर से जीने का मर्म सिखाती है। यह किताब सभी उम्र के लोगों को कुछ करने के लिए हौसलों की उड़ान का संचार करती है। "दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी की लेखिका अंकिता सोनी के ऐसे विचारों का सार सुनकर वहां उपस्थित प्रतिभाओं के धनी मुख्य अथितिगण और श्रोतागण की तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा। यह अपने आप में ही अदम्य बात है कि लेखिका को सुनकर वहां मौजूद महानुभावों ने सराहना के फूलों के पुल बाँध दिए… इस नयी उभरी सितारे के नाम जिसने महिला सशक्तिकरण की भी मिशाल पेश की हैं। यह पंक्तियाँ लेखिका अंकिता सोनी पर सटीक बैठती है कि….
'असफलता एक चुनौती है…,इसे स्वीकार करो….,क्या कमी रह गई…देखों और सुधार करो….!!
जब तक न सफल हो…नींद चैन को त्यागो तुम…, संघर्ष का मैदान छोड़कर मत भागो तुम…!!!
कुछ किये बिना ही जय-जयकार नहीं होती…, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती…!!!!'
 
 
कार्यक्रम की समाप्ति लेखिका अंकिता सोनी के साथ फोटोग्राफी लेने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गयी। साथ ही उनको किताब 'दास्ताँ-ऐ-ज़िन्दगी' के लिए बधाई देने वालों का जमावड़ा लग गया। इसी से इस शाम की शमा का अंत वन्दे मातरम गीत से समापन किया गया ।
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