छेड़खानी के विरोध में आंदोलन कर रही छात्राओं पर लाठी चार्ज, गुस्साई छात्राओं ने बाल तक मुंडवाये थे…

रिपोर्ट – मोहम्मद अफज़ल (वाराणसी)

उत्तर प्रदेश –  बीते दो दिनों से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छेड़खानी के विरोध में बीएचयू सिंह द्वार पर बैठी विश्वविद्यालय की छात्राओं का धरना शुक्रवार आधी रात को पुलिस के लाठीचार्ज से खत्म हो गया। जिसका परिणाम ये हुआ कि छात्र लाठीचार्ज करने के विरोध में उग्र हो गए और जमकर पथराव व आगजनी की गई।

 

बता दे कि वाराणसी में 22 तारीख को विजुअल आर्ट्स की छात्राएं धरने पर बैठ गई और उनका आरोप था कि उनके साथ की एक लड़की के साथ परिसर में ही भद्दी छेड़खानी हुई हैं, और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर उन्होंने शिकायत भी की लेकिन जब कार्यवाही नही हुई तो धरने पर बैठ गई। दो दिन चले धरने के दौरान शासन और बीएचयू प्रशासन की तरफ से छात्राओं को काफी मनाया गया । लेकिन जब ये छात्राएँ नही मानी तो बीती रात पुलिस ने इन्हें हटाने के लिए इनके ऊपर लाठी चार्ज कर दिया। जिसमे कई छात्राएं घायल हुई जिनका आरोप हैं कि कोई भी महिला पुलिस नही थी और हमे पुलिस ने काफी मारा हैं ।


दरअसल पूरा मामला उस वक्त बिगड़ा जब दर्जनों की संख्या में छात्र और छात्राएँ वीसी आवास पहुंचे और आवास वीसी से मिलने की मांग करने लगे पर वीसी के न मिलने पर आवास पर पथराव करने लगे। जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने लाठीचार्ज कर दिया। जिसके बाद विश्वविद्यालय ने पुलिस को कार्यवाही के लिए अनुमति दी ।  फिर पुलिस ने माहौल को अपने कब्जे में लाते हुए जमकर लाठियां भांजी। इस लाठीचार्ज में जहाँ धरने पर बैठी लड़कियों को खदेड़ा गया तो वहीं साथ दे रहे छात्रों ने भी जमकर पुलिस की लाठियां खाई।  । वहीं जिलाधिकारी का कहना था कि लड़कियों के ऊपर लाठिचार्ज नही हुआ हैं। 


दो दिन से धरने पर बैठी छात्राओं की सिर्फ यहीं मांग थी कि हमारी सेफ्टी सुनिश्चित हो और अपनी इसी मांग को लेकर वो विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलना चाहती थी लेकिन  कुलपति महोदय तो इनसे नही मिला। इनकी पुलिस के डंडों से मुलाकात जरूर हुई ।इस लाठी से इनकी आवाज तो शायद दब जाए पर सवाल अब भी वही बना रहेगा कि विश्वविद्यालय में छात्राएँ सुरक्षित क्यों नही हैं। 

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