CM साहब….आपकी UP पुलिस करती है फर्जी एनकाउंटर!!

बाराबंकी के एसपी अनिल कुमार सिंह का अपनी कुर्सी बचाने का एक और कारनामा सामने आया है , जहा हाल ही में जिले में ताबड़तोड़ हुए अपराधो को गुडवर्क में बदलने के लिए बाराबंकी पुलिस मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाते हुए हिरासत में मौजूद अपराधियो को ही गोली मार कर बहादुरी के झंडे गाड़ने में जुटी हुई है । बाराबंकी पुलिस की ये  करतूत है मोहम्मदपुर खाला थाना इलाके की जहा पुलिस ने बीती रात बदमाशो के साथ मुठभेड़ के बाद 5 बदमाशो को गिरफ्तार करने का दावा किया और मुठभेड़ में 2 बदमाशों और एक दरोगा समेत 3 पुलिसकर्मियों के भी गोली लगने से घायल होने की पटकथा लिख डाली । लेकिन पुलिसिया मुठभेड़ की इस कहानी की परतें उस वक़्त खुलने लगी जब पुलिस की गोली से घायल बदमाश अंशू पुष्कर ने मुठभेड़ की कहानी को सिरे से नकारते हुए बताया कि बाराबंकी पुलिस तीन दिन पहले ही उसे और उसके दोस्त इरफान को रायबरेली जिले के बछरावां इलाके से गिरफ्तार करके लायी थी और दो दिनों तक थाने में ही अवैध हिरासत में रखने के बाद उसे  रात के डेढ़ बजे सुनसान इलाके में लेजाकर गोली मार दी गयी । इतना ही नही मोहम्मदपुर खाला इलाके के जिस कठोरिया पुल पर पुलिस बदमाशो से मुठभेड़ की बात कह रही उसके आस पास रहने वाले ग्रामीणों ने भी रात के वक़्त गोलियो की आवाज़ सुनने से इनकार किया है । सबसे अहम बात तो ये की बाराबंकी पुलिस बदमाशो के पास से जो दो गाड़िया बरामद होने का दावा कर रही उसमे से एक स्विफ्ट जो बीती 26 जनवरी को जेन कार सवार बदमाशों द्वारा बाराबंकी के मोहम्मदपुर इलाके में 2 दवा व्यापारियों के अपहरण के दौरान लूटी गई थी और जिसे लखनऊ पुलिस ने लखनऊ के आलमबाग इलाके में लावारिस बरामद किया था  और जेन कार लखनऊ पुलिस द्वारा पकड़े गए 2 बदमाशो के कब्जे से बरामद हुई थी ।  

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