जस्टिस जोसेफ पर कोलेजियम ने लगाई मुहर…………

उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ को पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाने की सिफारिश करने के फैसले पर पुनर्विचार के लिये शुक्रवार को कोलेजियम की अहम बैठक हुई. इसमें उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ कानाम नाम सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए सरकार के पास दोबारा भेजे जाने पर एकमत से जजों में सहमति बनी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोलेजियम के सभी सदस्य- न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने हिस्सा लिया. यह बैठक करीब एक घंटे चली. लेकिन अबकी बार तीन अन्य उच्च न्यालयों के चीफ जस्टिस के नाम भी भी फेहरिस्त में जस्टिस जोसफ के आगे-पीछे होंगे. इनमें कलकत्ता, राजस्थान और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम भी भेजे जाएंगे. इस महीने की शुरुआत यानी दो मई को कोलेजियम बैठक में जस्टिस जोसफ को सुप्रीम कोर्ट आने का टिकट कन्फर्म नहीं हो पाया था. कोलेजियम ने तय किया कि जस्टिस के एम जोसेफ के साथ आंध्र-तेलंगाना हाईकोर्ट, कलकत्ता और राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भी सुप्रीम कोर्ट में फेयर रिप्रेजेंटेशन के तौर पर नियुक्ति की सिफारिश की जाएगी. इस पर शुक्रवार यानी 11 मई की बैठक में फैसला होना था लेकिन यह फिर टल गया था। अन्य हाई कोर्ट के जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नाम भेजे जाने से पहले विस्तार से बातचीत की जरूरत बताई गई है और इस कारण मीटिंग को 16 मई तक के लिए टाल दिया गया है। अब 16 मई को शाम के सवा चार बजे कॉलिजियम की बैठक होगी। दो मई के बाद उत्तराखण्ड हाईकार्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसफ को सुप्रीम कोर्ट में लाये जाने को लेकर जस्टिस चेलमेश्वर ने एक और चिठ्ठी चीफ जस्टिस को लिखी है. चिट्ठी में जस्टिस चेलमेश्वर ने जस्टिस जोसफ पर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिशों पर अमल की राह में आ रहे नियमों के रोड़े का ज़िक्र करने वाले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की चिट्ठी के हर बिंदु का जवाब दिया है.  सरकार ने 26 अप्रैल को जोसेफ का नाम कलीजियम को वापस करते हुए दोबारा विचार करने को कहा था। सरकार का कहना था कि कलीजियम ने केएम जोसेफ का नाम जो सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए सिफारिश की थी वह सुप्रीम कोर्ट के मानक के हिसाब से सही नहीं है क्योंकि केरल से पहले से ही पर्याप्त प्रतिनिधित्व हैं। कलीजियम अगर दोबारा किसी नाम को सरकार के पास भेजती है तो सरकार उसे वापस नहीं कर सकती।

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