सत्ता हड़पने के लिए नक्सलियों की मदद ले रही कांग्रेस: छापेमारी में मिले सबूत

साल 2018 के पहले दिन हुई भीमा-कोरेगांव हिंसा एक बार फिर चर्चा में है. बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए माओवादियों की आर्थिक मदद कर रही है.पुणे के भीमा-कोरेगांव हिंसा में नक्सलियों के पैसे का इस्तेमाल किया गया था। छापेमारी में जब्त किए गए कागजात इसके सबूत हैं। इसी सबूत के आधार पर पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बृहस्पतिवार को पुणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त रवींद्र कदम ने यह जानकारी दी। संयुक्त पुलिस आयुक्त कदम ने कहा कि 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में हुई जातीय हिंसा एलगार परिषद के प्रमुख आयोजक सुधीर ढवले सहित गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपियों के नक्सलियों से संबंध हैं। लेकिन, इस कार्यक्रम में शामिल हुए अन्य 250 संगठनों का नक्सलियों से कोई संबंध सामने नहीं आया है। 

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव की घटना में दलितों को एक औजार की तरह इस्तेमाल किया गया। वहां पर जो विरोध प्रदर्शन हुआ वह स्वप्रेरित नहीं बल्कि प्रायोजित था। इस बाबत जो पत्र पात्रा ने दिखाया, वह माओवादी संगठन भाकपा (माओवादी) के नेता ने अपने साथी को लिखा था। उसमें कांग्रेस से धन मिलने की बात लिखी हुई है। इस धन से चुनाव से पहले देश में अराजकता पैदा करने की बात लिखी हुई है।

प्रवक्ता ने कहा, भाजपा संपर्क और समर्थन में विश्वास रखती है तो कांग्रेस अराजकता के जरिये सत्ता पाना चाहती है। सत्ता के लिए वह किसी से भी हाथ मिला सकती है, भले ही वे नक्सली ही क्यों न हों। इससे कांग्रेस का असली चेहरा उजागर हुआ है। भीमा-कोरेगांव की जातीय हिंसा पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को घेरा है। कहा है कि भाजपा की सरकार नाकामी छिपाने के लिए खतरनाक खेल, खेल रही है। वह दलितों को नक्सलियों से जोड़ रही है, जो भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है। जबकि माकपा ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार पीडि़तों की आवाज दबाने का कार्य कर रही है। वह हमलावर तबके का साथ दे रही है।

पिछले साल 31 दिसंबर को पुणे के शनिवार वाड़ा में ब्रिटिश सेना और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच हुए ऐतिहासिक युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर एलगार परिषद आयोजित किया गया था। इस दिन दलित नेता ब्रिटिश फौज की जीत का जश्न मनाते हैं। उनका मानना है कि ब्रिटिश फौज में महार टुकड़ी ने यह जीत दर्ज की थी। इस परिषद के बाद झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। उसके बाद पूरा महाराष्ट्र जातीय हिंसा की चपेट में आ गया था।  

महाराष्ट्र के पुणे में 200 साल पुराने युद्ध भीमा-कोरेगांव की बरसी को लेकर जातीय संघर्ष छिड़ गया था. बाद में इसकी आग पूरे महाराष्ट्र में फैल गई. कई शहरों में हिंसक घटनाएं भी हुई थीं. इस मामले में पुलिस ने संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज भी किया, बाद में मिलिंद फरार हो गए थे.

वैसे प्रकाश आंबेडकर ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया है। कहा है कि वह इस बारे में कुछ नहीं जानते। वहीं, पुलिस ने बुधवार को रोना विल्सन समेत पांच लोगों को हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।

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