कोई मुझको लौटा देे बचपन की बातं

बचपन की बाते

कोई मुझको लौटा देे बचपन की बाते !
कोई मुझसे करले लडकपन की बातें!!

वो नदिया किनारे घरोन्दे बनाना!
घरोन्देा मे सपनों की दुनिया बसाना!
वो सेम्बल के फूलों को फू से उडाना!
उडने पे उनके वो ताली बजाना!

वो झाडी के बेरों पे जी का लुभाना !
वो आपस के झगडे वो साथी की बातें!
कोई मुझको लौटादे बचपन की बातं !

वो बूढी रहमती की लम्बी कहानी !
जवानी की बातें नज़र की जुबानी!

वो जंगल का राजा, वो परियों की रानी!
वो भूतों की नगरी वो शैतां की नानी!
हँगूरों की लै पे कहानी सुनाना!
क्हानी- कहानी में, बेसुर सा गाना!

वो गैरों से, अपनों के से रिष्ते नाते!
कोई मुझको लौटा दे बचपन की बातं !

ना बिजली थी जब तक,ना कूलर चला था!
ना टी वी सिनेमा का चक्कर चला था!

कहीं नीम था कहीं बड तला था!
दरख्तों के साये में बचपन पला था!
वो बरसात में क्या, पपीहे की तानें !
बजायें हों घुंघरू जैसे हवा नें!

वो तितली पकडने को मासूम घातें!
कोई मुझको लौटा दे बचपन की बातं !

1472954_251502755014800_1028056022_n[1]परिचय :
नाम : साबिर अली ‘धानवी’
परिचय : साबिर अली यूपी के सहारनपुंर जिले के घाना खंडी के रहने वाले है। सन् 1969 में जन्मे साबिर अली पेषे से अध्यापक है। साबिर अली ने सन् 1990 से लेखन की दुनिया में कदम रखा। बिसरी यादें के नाम से धानवी साहब की किताब भी प्रकाषित हो चुकी है। उपरोक्त अंष उसकी किताब से     लिया गया है।

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