क्या आप जानते हैं क्या है ‘महा’ शब्द की ‘महिमा’ का महत्व?

आजकल ‘महा’ शब्द का चलन जोरों पर है। जहां भी देखो वहां ‘महा’ का ही महिमा मंडन हो रहा है। सुबह से लेकर शाम तक खबरिया चैनलों में ‘महा’ का ही गुणगाण देखने को मिलता है। ‘महा’ क्या लग गया उस खबर की महत्ता बढ़ जाती है। कभी ‘महाखोज’ ‘महाविनाश’ ‘महाप्रलय’ ‘महाबलि’ तो कभी ‘महाजाम’ ‘महामुकाबला’ जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं।

रितेश कुमार झा, हैदराबाद

आजकल ‘महा’ शब्द का चलन जोरों पर है। जहां भी देखो वहां ‘महा’ का ही महिमा मंडन हो रहा है। सुबह से लेकर शाम तक खबरिया चैनलों में ‘महा’ का ही गुणगाण देखने को मिलता है। ‘महा’ क्या लग गया उस खबर की महत्ता बढ़ जाती है। कभी ‘महाखोज’ ‘महाविनाश’ ‘महाप्रलय’ ‘महाबलि’ तो कभी ‘महाजाम’ ‘महामुकाबला’ जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं।

 

सृष्टि की रचना कैसे हुई?

जिस भी शब्द के आगे ‘महा’ लग जाए उसका महत्व बढ़ जाता है। महा की महिमा अपरम्पार है। महा की महिमा आदिकाल से ही स्थापित है। आरंभ सृष्टि की संरचना से ही करते हैं। धरती पर सृष्टि की रचना कैसे हुई? इस एक प्रश्न की खोज में इंसान सदियों से अपने दिमाग को उलझा रहा है लेकिन उसे कामयाबी तब मिली जब महाखोज हुई। स्विटजरलैंड के यूरोपीय सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) में जमीन से 300 फीट नीचे दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने सालों की कड़ी मेहनत के बाद गॉड पार्टिकल यानी हिग्स बोसोन की ‘महाखोज’ की थी तो दुनिया हैरान रह गई थी।

 

‘महादेव’ देवों के भी देव हैं

उसे पहली बार मालूम हुआ कि इस चराचर जगत की उत्पत्ति कैसे हुई। किंतु वैज्ञानिक भी ‘गॉड’ का एक पार्टिकल ही खोज सके। यद्यपि देव तो खुद देव होते हैं। उनका कण-कण में वास होता है। लेकिन ‘महादेव’ देवों के भी देव हैं। उनसे बढ़कर कोई दूसरा देव नहीं है। उन्हें देवाधिदेव कहा जाता है। हलाहल विष पीने वाले नीलकंठ का अमरत्व अमिट था, है और रहेगा।

 

केदारनाथ में आया था ‘महाप्रलय’ !

2013 में देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में महादेव की ही नगरी केदारनाथ में ‘महाप्रलय’ आया था। उस ‘महाप्रलय’ में सब कुछ तबाह हो गया था। लेकिन जल प्रलय के बीच भी मूर्ति के रूप में महादेव अमूर्त होकर विराजमान रहे । कलयुग में एकमात्र जीवंत देवता पवनसुत हनुमान को भी ‘महाबली’ कहा जाता है। उनके बल पर तो किसी को कोई शक नहीं था। देवताओं ने उन्हें ये वरदान दे रखा था कि उन पर किसी भी अस्त्र-शस्त्र का कोई असर नहीं होगा। यहां तक कि ‘ब्रह्मास्त्र’ का भी उन पर कोई असर नहीं होता था। मेघनाद ने जब उन पर ‘ब्रह्मास्त्र’ का प्रयोग किया था तो वे अपनी मर्जी से, ब्रह्मा जी का सम्मान रखने के लिए ‘ब्रह्मास्त्र’ के पाश में बंध गए थे। साफ है कि वे बलशाली थे। लेकिन ‘महा’ लग जाने से वे महाबलशाली हो गए। वे भी महादेव के अंश रुद्रावतार के रूप में संसार को आसुरी शक्तियों से बचाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

 

ऋषि से 'महर्षि'

इन दैवी शक्तियों से अलग राजा की उपाधि प्राप्त व्यक्ति स्वयं में अधिपति होता है। लेकिन, जब उस उपाधि के आगे ‘महा’ लग जाए तो वह महाराजा हो जाता है। उसका रुतबा बढ़ जाता है। इसी तरह रानी भी रानी होती है। लेकिन जब उसके नाम के आगे ‘महा’ लग जाए तो वो महारानी हो जाती है। उसका महत्व बढ़ जाता है। वो दूसरी रानियों से ज्यादा श्रेष्ठ मानी जाती है। ऋषि तो ऋषि होते हैं लेकिन उनके नाम के आगे ‘महा’ लग जाए तो वे महर्षि हो जाते हैं। उनकी पदवी बढ़ जाती है।

 

समर चैनलों की मेहरबारनी से 'महासमर' !

संग्राम तो संग्राम होता है। न छोटा होता है बड़ा, लेकिन जब उसके आगे ‘महा’ लग जाए तो वो महासंग्राम हो जाता है। जैसे विश्वयुद्ध लेकिन फिलहाल भारत-पाकिस्तान के बीच खेल के मैदान पर होने वाले हर मुकाबले की मिसाल लेते हैं। क्या वह महासंग्राम नहीं होता है? खबरिया चैनल उसे ‘महाफाइनल’ के नाम से नवाजते हैं। समर भी समर होता है। लेकिन जब चुनाव का मौसम आता है तो चैनलों की मेहरबारनी से महासमर बन जाता है।

 

महा’ लगा  तो ‘महाशत्रु’?

ज्ञानी खुद में ज्ञानी होता है। लेकिन जब उसके नाम के आगे महा लग जाता है तो वो ‘महाज्ञानी’ कहलाता है। उसके ज्ञान और पांडित्य की कोई बराबरी नहीं कर सकता है। वो ‘महाबुद्धिमान’ हो जाता है। शत्रु तो शत्रु होता है। लेकिन डिजिटल दुनिया ने उसके नाम के आगे ‘महा’ लगाकर उसे ‘महाशत्रु’ कर दिया है। सच में महा महान है। महा की महिमा अनंत है। उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता है। अगर महा नहीं होता तो इस दुनिया का क्या होता ? विज्ञान ने हमें बहुत कुछ दिया है। हम जिस हाई टेक दुनिया में जी रहे हैं वो सब विज्ञान की ही देन है। दुनिया को मुट्ठी में कर लेने जैसा अहसास भी है लेकिन विज्ञान के आगे कोई महा नहीं है। खुद विज्ञान भी इस बात को मानता है कि उससे ऊपर भी एक शक्ति है जो इस सृष्टि का संचालन कर रही है।

 

इसरो के वैज्ञानिकों के माथे पर तिलक 

जब इसरो ने अंतरिक्ष में 104 सैटेलाइट्स यानी उपग्रह भेजकर इतिहास रचा था तो पूरी दुनिया ने उसे सलाम किया था क्योंकि इससे पहले ऐसा किसी ने नहीं किया लेकिन स्वयं इसरो के वैज्ञानिकों को देखकर, जिनकी वेशभूषा और माथे पर तिलक इस तथ्य की पुष्टि कर रहे थे कि उन्हें इतिहास रचने की शक्ति प्रदान करने वाली कोई महाशक्ति भी है। महा की महिमा यहीं तक सीमित नहीं है। उसका जलवा खेल के मैदान पर भी देखने को मिलता है। जब दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के 434 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत हासिल की थी तो उसे ‘महाजीत’ कहा गया था। सच में ‘महा’ की महिमा अपरंपार है। ‘महा’ महान है। अगर ‘महा’ नहीं होता तो पता नहीं क्या होता?

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