आस्था या अंधविश्वास…अच्छी बारिश के लिए कराई जाती है भगवानों की शादी

अब तक आपने बारिश करवाने के लिये मेंढक मेढकी की शादी करवाने की बात सुनी होगी……लेकिन अब बारिश के लिये भगवान की भी शादी लोग करा रहे है…..अब इसे आस्था कहे या अंध्विश्वास सदियो पुरानी परंपरा लोग आज भी निभा रहे है……कुछ ऐसा ही नजारा धमतरी जिले के नगरी ईलाके मे देखने को मिला है…..यहा लोग अच्छी बारिश के लिये भगवान की शादी करा रहे है…..हो भी पूरे रिति रिवाज से जिसमे ईलाके के करीब दो दर्जन गांव के लोग शामिल होते है…..और बाजे गाजे के साथ नाच गा कर पूरे रस्म को अदा किया जाता है…..और तब तक जश्न मनाते है जब तक बरसात ना हो जाये….

.इन दिनों देश के कई राज्य आफत की बरसात लोगो की परेशानी का सबब बन गया है……जिससे लोगो को काफी जान माल की नुकसान उठाना पड रहा है…..तो वही मौजूदा वक्त मे छत्तीसगढ बूंद बूंद पानी के लिये तरस रहा है….और रसात नही होने से किसानों को अकाल की चिंता सताने लगी है….अगर बात करे धमतरी जिला की तो इस बार साल भी  औसतन  अल्प वर्षा ने किसानों  के माथे पर सिकन ला दी है…..ऐसे में आदिवासी ईलाका नगरी में इंद्रदेव को रिझाने ईलके के करीब 20 गाव के लोग भगवान की शादी कराने मे जुटा हुआ है…..ऐसी मान्यता है की  सिहावा मे विराजमान भीमा देव और भीमा देवी की शादी कराने से इंद्रादेव काफी प्रसन्न होते है और वर्षा कराते है…..जिसके चलते इस रस्म को निभागने के लिये ईलाके के लोग जुट है और अपने देवता को खुश करने मे लगे हुऐ है……इस मौके पर  आदिवासीयो द्वारा भीमा देव स्थल पर नाच बजाना किया जाता है खासतौर पर यहा आदिवासी बस्तरिया नृत्य करते है…..और तब तक करते है जब तक भीमा देव और इंद्रादेव प्रसन्न होकर बारिश ना करा दे…… लोगो की माने तो इस परंपरा को सदियो पहले आदिवासियो ने बनाई थी जो आज भी बदस्तूर जारी है……आदिवासी बताते है की भीमा देव और भीमाइन देवी पति पत्नी है……और जो भीमा देव है वे सिहावा मे महानदी के उस पार निवास करते है…..और भीमाइन देवी थाना सिहावा के पास विराजमान है……जब भी नगरी ईलाके में मानसून रूठ जाते है तब इंद्र देवता को खुश करने क्षेत्र के 5 पाली के लोग इकट्ठा होते है और दोनों का विवाह विधि विधान से किया जाता है….. जिसमे इस शादी का गवाह बनने महिला बच्चे बड़े बूढ़े सभी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते है और …बाकायदा गाजे बाजे के साथ भीमा देव का बारात निकाला जाता है……

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