‘सड़क दुर्घटनाएं और हम बेख़बर…. बदलें प्राथमिकताएं’: विनोद सिरोही, DSP

आप अपने आसपास देखिये सोचिये और समझिये नजर दौड़ाइये आपके कितने परिचित हैं जो सड़क पर लूट का शिकार हुए हैं, कितने हैं जो घर पर अपराध का शिकार हो कर हमेशा के लिए जीवन सम्बन्धी घातक घटनाओं का शिकार हुए हैं ? अब आप फिर से नजर दौडाइए और सोचिये उसी दायरे में सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों के बारे में जिन्होंने जीवन खो दिया या हमेशा के लिए अपंग हो गए | दुसरे प्रकार के लोग निश्चित ही बहुत ज्यादा होंगे | समाचारपत्रों में भी पढ़ लीजिये और तुलनात्मक हिसाब लगाइए |

उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक अपराध ग्रस्त क्षेत्रों में भी सड़क दुर्घटनों में जान गवाने वालों की संख्या अपराधों में जान गवाने वालों की संख्या से कई गुना है | सभी सहमत होंगे मगर सब कुछ जानते हुए भी हम अनजान हैं सुरक्षा के प्रति हम बेहद लापरवाह हैं | इसकी वजह ये भी हो सकती है कि अभी हमें इस भयावह स्थिति का आभास ही नहीं हो | कोई भी समाज कई चीजों से प्रभावित होता है | अपने समाज की ही बात करें तो वर्तमान में अखबार, टीवी समाचार, सोशल मीडिया और राजनीतिक विचारों से ज्यादा प्रभावित है | अभी सुरक्षा के प्रति कहीं भी जागृति नहीं दिखती | खास तौर पर सड़क दुर्घटनाओं सम्बन्धी सुरक्षा | कहीं पर भी ये चर्चा का विषय नहीं है |

 

अब मान भी लीजिये कि आप या आपके प्रियजन या आम नागरिक सबसे ज्यादा खतरे में है तो सबसे बड़ा कारण सड़क दुर्घटना है जिसकी ओर हम आँखें मूंदे बैठे हैं | यदि सड़क पर चलते वक्त दुपहिये चालक हेलमेट लगालें और चार पहिये चालक सीट बेल्ट ही लगालें तो बहुत सारी कीमती जान बच सकती हैं या लोग अपंग होने से बच सकते हैं या दुर्घटनाओं के बाद से ठीक होने तक की खुद की गहरी पीड़ा, भरी आर्थिक हानि और परिजनों के छलकते दर्द से मुक्ति मिल सकती है | अभी तक पुलिस की भी प्राथमिकता वाहनों के कागज चेक करना, ड्राइविंग लाईसेंस, रजिस्ट्रेशन, बीमा, पोल्यूशन, फिटनेस ही है , सीट बेल्ट, हेलमेट या चलते हुए मोबाइल फ़ोन पर बात करना, खतरनाक तरीके से गाडी चलाना नहीं रहा है |

 

आप ही बताईये क्या जीवन की सुरक्षा से बड़ी कोई और बात हो सकती है, ये सब महत्वपूर्ण हैं मगर जीवन की सुरक्षा की तुलना में नगण्य | इस सबका कारण है कि पुलिस की खिचाई या जबाबदेही अपराध सम्बंधित मामलों पर लगती है | पुलिस वाला दिन भर हेलमेट और सीट बेल्ट पर चालान करे तो उसे शाबासी नहीं मिलेगी भले ही उसने सैंकड़ों लोगों के जीवन के खतरे को दूर करने का कर्तव्य किया हो | एक छोटी से चोरी पर जनता, मीडिया या अन्य उसकी क्लास ले लेंगे | फिर … उसका ध्यान प्राथमिकता पर होगा | अब वक्त है इस खतरे को समझे , जाने और प्राथमिकताओं को चेंज करें | जीवन और शरीर सलामती से बड़ी कोई प्राथमिकता नहीं | कोई भी सड़क दुर्घटना में हम किसी का भी दोष निकाल देते हैं किन्तु सबसे बड़ा कारण है हमारी सोच जिसमे लापरवाही, ट्रेफिक सेन्स की कमी और जन चेतना का अभाव है | सडक दुर्घटनाओं से खुद और सभी प्रियजन को बचाएं | आज से कोई भी पुलिस वाला यदि आपको सीट बेल्ट या हेलमेट न लगाने पर या खतरनाक ड्राइविंग या गाडी चलाते हुए चालान करे तो उसे धन्यवाद कीजिये कि ये उसने आपकी या उस अनजाने की जिंदगी को दुर्घटना से बचा कर सलामत किया है जिसके आप खुद शिकार बन सकते थे या किसी अन्य को बना सकते थे या दोनों ही शिकार बनते | नजरिया बदलिए , आप शुक्रिया करके उसका हौसला बढाइये | मुख्य मंत्री जी ने खुद पहल करते हुए इसके लिए अभियान चलाया है जिसमें आम नागरिक के जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए सीट बेल्ट ,हेलमेट प्रयोग , खतरनाक ड्राइविंग तेज गाडी व् गाडी चलाते हुए मोबाइल प्रयोग करना के सम्बन्ध में पुलिस को अभियान चलाकर कार्यवाही करने को आदेश दिया है | इसके मर्म और महत्व को समझें जनता, मीडिया और पुलिसजन इसे सफल बनायें | जान लें कि यदि आप इस अभियान को सदा के लिए लागू करने में सहयोगी हैं तो वर्तमान समय की सबसे बड़ी सेवा है खुद और सबकी |

 

पुलिस जनों को भी चाहिए कि सद्व्यवहार के साथ इस अभियान को इतना सख्ती से चलायें कि कोई भी बिना हेलमेट और सीट बेल्ट लगाये कोई भी सड़क पर चल न सकें | आपकी सख्ती ही आपकी सबसे बड़ी ड्यूटी और सेवा है | पुलिस वाले खुद भी इसका पालन कर सुन्दर उदाहरन प्रस्तुत करें, अपराध नियंत्रण के साथ साथ इसे भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी समझें | यदि सरकार ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में चुन ही लिया है तो नतीजे दिखने चाहिए, सबका साथ और सोच बदलनी बहुत जरूरी है |अंत में …..अब भी यदि किसी को मुगालता हो तो सडक दुर्घटनाओं के आंकड़े देख लें और फिर से आसपास नजर दौड़ा लें |

लेखक परिचय :
नाम :
विनोद कुमार सिरोही
परिचय : विनोद कुमार सिरोही यूपी के एक ऐसे पुलिस अधिकारी है, जो सर्विलांस के एक्सपर्ट माने जाते हैं। पुलिस विभाग में अपने फर्ज और कतर्व्य निर्वहन को लेकर विनोद कुमार सिरोही जितने आदर्श माने जाते हैं, उतनी ही इनकी लेखनी के भी लोग कायल है। विनोद कुमार सिरोही बेहद ही सटीक और उम्दा किस्म के लेखक है। उपरोक्त अंश उसकी फेसबुक वॉल से लिया गया है। 
                                                                                                                         फेसबुक लिंक : https://www.facebook.com/inspectorvinodsirohi

 

 

 

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