जीएसटी काउंसिल 21 जुलाई होने वाली बैठक में कुछ वस्तुओं पर घटा सकती है टैक्स की दर

जीएसटी काउंसिल अपनी होने वाली अगली बैठक में कुछ वस्तुओं पर टैक्स की दर घटा सकती है. ज्यादातर ऐसी वस्तुओं पर दर में कटौती की जा सकती है जिनका राजस्व प्राप्ति पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है. जीएसटी काउंसिल की बैठक 21 जुलाई को होगी

जिन उत्पादों पर जीएसटी दर में कटौती की जा सकती है उनमें हस्तशिल्प और हथकरघा सामान, नैपकिन और कुछ अन्य सेवायें शामिल हो सकतीं हैं. माल और सेवाकर यानी जीएसटी देश में एक जुलाई 2017 को लागू किया गया था. इस व्यवस्था में चार दरें पांच फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी रखी गई है. कई उद्योग संगठनों और संबंध पक्षों ने असंगठित क्षेत्र में तैयार किये जाने वाले सामान्य स्वास्थ्य और रोजगार पैदा करने वाले उत्पादों पर दर में कटौती की मांग की है.

जीएसटी के बारे में कोई भी फैसला लेने के मामले में जीएसटी काउंसिल ही सर्वोच्च निकाय है. काउंसिल ने इससे पहले जनवरी 2018 में हुई बैठक में 54 सेवाओं और 29 वस्तुओं पर जीएसटी दर में कटौती का फैसला लिया था. इससे पहले नवंबर 2017 में हुई बैठक में भी काउंसिल ने 178 वस्तुओं को जीएसटी की सबसे ऊंची दर 28 फीसदी के वर्ग से हटाया था. इस दौरान काउंसिल ने रेस्त्राओं के लिये भी टैक्स की दर घटाकर 5 फीसदी कर दी थी.

मंत्रियों के एक समूह ने बुधवार को एथेनॉल पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने की सिफारिश की, लेकिन उसने चीनी पर सेस लगाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, क्योंकि गन्ना किसानों के बकाया पहले से घटा है।

अगर उनकी राय अनुकूल होती है, तो मंत्रिसमूह लक्जरी सामानों पर एक फीसदी कृषि सेस लगाने के विकल्प पर विचार कर सकता है, जिसका इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में किसी भी तरह की अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने में किया जा सकता है।

चीनी की आपूर्ति पर पांच फीसदी जीएसटी के अलावा, प्रति किलोग्राम तीन रुपये तक का सेस लगाने के केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए जीएसटी परिषद ने मई में हुई अपनी अंतिम बैठक में मंत्रिसमूह का गठन किया था।

पिछले वित्त वर्ष के दौरान जीएसटी से सरकार को कुल 7.41 लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई. इस लिहाज से पिछले वित्त वर्ष में औसत मासिक प्राप्ति 89,885 करोड़ रुपये रही. केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने विश्वास जताया है कि जीएसटी के तहत राजस्व प्राप्ति बढ़ने के साथ टैक्स दरों को अधिक तर्कसंगत बनाने की सरकार की क्षमता बढ़ेगी.

शुल्क लगाने से जमा एकत्रित होने वाली राशि, लगभग 6,700 करोड़ रुपये होगी, जिसे एक अलग फंड में रखा जाएगा और उसका इस्तेमाल चीनी क्षेत्र तथा गन्ना किसानों की समस्याओं को निपटाने के लिए किया जाएगा। मंत्रिसमूह की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में शर्मा ने कहा कि चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रति किलोग्राम 29 रुपये तय करने के बाद किसानों का गन्ना बकाया 5,000 करोड़ रुपये घटकर 18,000 करोड़ रुपये पर आ गया है।

 

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