अस्पताल की लापरवाही ने ली लड़की की जान

 राजधानी लखनऊ के लोक बंधु अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली। मामला आशियाना के लोकबंधु हॉस्पिटल का है। यहां 14 साल की किशोरी को आकाशीय बिजली से झुलस जाने के कारण भर्ती कराया गया था। लापरवाही का आलम ये रहा कि डॉक्टरों ने जीवित लड़की को मृत घोषित कर मर्चरी हाउस भेज दिया। मृतका के परिजनों का आरोप है कि उनकी लड़की सिमरन 9वीं कक्षा की छात्रा थी। उसे रविवार की शाम लगभग 6 बजे लोकबंधु अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे 7:30 बजे मृत घोषित कर मर्चरी में भेज दिया और परिवार को इस बात की जानकारी भी नहीं दी। परिजनों के गुस्से का तब ठिकाना नहीं रहा जब उनकी बच्ची को मोर्चरी हाउस से बाहर निकाला गया तो उसकी नब्ज चल रही थी। परिजनों ने अस्पताल में जोरदार हंगामा काटा और बाद में बच्ची को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि लड़की की मौत आधे घंटे पहले हुई है। परिजन जब अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने आशियाना थाने पहुंची तो पुलिस ने परिजनों को डरा-धमकाकर भगा दिया। वहीं जब पूरे मामले के बारे में लोक बंधु अस्पताल की सीनियर डॉक्टर अमिता यादव से बात की गई तो उन्होंने परिजनों के द्वारा अस्पताल प्रशासन पर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि यदि परिजन बच्ची को थोड़ा और पहले लाते तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। वहीं, राजधानी लखनऊ के लोक बंधु अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली। मामला आशियाना के लोकबंधु हॉस्पिटल का है। यहां 14 साल की किशोरी को आकाशीय बिजली से झुलस जाने के कारण भर्ती कराया गया था। लापरवाही का आलम ये रहा कि डॉक्टरों ने जीवित लड़की को मृत घोषित कर मर्चरी हाउस भेज दिया। मृतका के परिजनों का आरोप है कि उनकी लड़की सिमरन 9वीं कक्षा की छात्रा थी। उसे रविवार की शाम लगभग 6 बजे लोकबंधु अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे 7:30 बजे मृत घोषित कर मर्चरी में भेज दिया और परिवार को इस बात की जानकारी भी नहीं दी। परिजनों के गुस्से का तब ठिकाना नहीं रहा जब उनकी बच्ची को मोर्चरी हाउस से बाहर निकाला गया तो उसकी नब्ज चल रही थी। परिजनों ने अस्पताल में जोरदार हंगामा काटा और बाद में बच्ची को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि लड़की की मौत आधे घंटे पहले हुई है। परिजन जब अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने आशियाना थाने पहुंची तो पुलिस ने परिजनों को डरा-धमकाकर भगा दिया। वहीं जब पूरे मामले के बारे में लोक बंधु अस्पताल की सीनियर डॉक्टर अमिता यादव से बात की गई तो उन्होंने परिजनों के द्वारा अस्पताल प्रशासन पर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि यदि परिजन बच्ची को थोड़ा और पहले लाते तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। 

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