मारी गई आदमखोर बाघिन अवनी (टी1), कम से कम 14 लोगों को बना चूकी थी अपना निवाला

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के पांढरकवड़ा जंगल में शुक्रवार रात नरभक्षी बाघिन अवनि (टी1) को मार दिया गया है. उसने कथित रूप से 14 लोगों की जान ली थी. इस बाघिन ने अपना पहला शिकार एक वृद्ध महिला को बनाया था. खेत में पड़े जब लोगों ने उसके शव को देखा तो पीठ पर पंजे के गहरे निशान मिले थे. महाराष्ट्र में कई लोगों की मौत के बाद इसी साल सितंबर में बाघिन की तलाश शुरू हो गई थी. हालाकि अवनी के आदमखोर होने के बाद महाराष्ट्र वन्य विभाग ने उसे देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हुए थे।

हालांकि, उसे बचाने के लिए भी कुछ एनजीओ आगे आए और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। लेकिन सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को ही बरकरार रखा। बताया जा रहा है की पंढारवड़ा में काफी समय से आदमखोर बाघिन का खौफ था। ये बाघिन अब तक कम से कम 14 लोगों को अपना शिकार बना चुकी थी। पांच साल की बाघिन (टी1) का इतना खौफ था कि पंढारवडा और आसपास के गांवों के लोग रात-रातभर जागकर पहरा देते थे। खौफ के कारण लोग जंगल में जाने से कतराते थे, जिसके चलते खेती करने और मवेशी पालने वाले लोग खासे परेशान थे

टी1 बाघिन को हैदराबाद के शॉर्प शूटर नवाब शाफत अली खान के बेटे असगर ने मार गिराया और इस दौरान उनके साथ वन विभाग का कोई कर्मचारी नहीं था। यह नियमों के खिलाफ है और इसी कारण से बाघिन के मारे जाने के बाद अधिकारी खुलकर बात करने और घटना का जिक्र करने सामने नहीं आए। वन विभाग ने अपने ही उन ऑर्डर्स का उल्लंघन किया जिनमें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से बाघिन को पहले ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करने की कोशिश करने को कहा गया था।

कोर्ट की ओर से इसमें सफलता न मिलने पर ही बाघिन के खिलाफ जानलेवा कदम उठाने को कहा गया था। जंगल में बनाए गए मचानों पर रेंजर्स लगातार निगरानी कर रहे हैं और बाकी रेंजर्स को इस ऑपरेशन की तैयारी में लगाया गया था। हाथियों पर सवाल होकर ट्रैंक्विलाइजर गन्स के साथ शार्प शूटर्स भी आदमखोर बाघिन की तलाश पर निकले थे। बाघिन को कैद कर पास के एक चिड़ियाघर में भेजने की योजना बनाई गई थी। ऐसे में बाघिन को मारे जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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