पेट्रोल-डीजल GST के दायरे में आऐ तो इतने कम हो जायेगें दाम

पिछले चार साल में मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल को दुधारू गाय की तरह इस्तेमाल किया है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद टैक्स बढ़ता रहा और इस वजह से पेट्रोलियम सेक्टर से सरकार का राजस्व चार साल में दोगुना हो गया. पेट्रोल-डीजल को केंद्र और राज्य सरकारें उसी तरह से टैक्स लगाकर भारी कमाई करने का साधन मानती रहीं, जैसा कि शराब में होता है.

चौंकाने वाली बात है कि महंगाई के इस दौर में भी ऐसा कम ही होता कि देश भर में एक ही उत्पाद के दामों को लेकर बवाल मचा हो। दिल्ली में प्याज का किस्सा शायद आपको याद हो, जिसके दामों ने सरकार के लिए आफत कर दी थी। आजकल ऐसा ही कुछ पेट्रोल-डीजल के साथ है, जिसकी हर रोज बढ़ती कीमतों ने जनता को खफा कर रखा है और सरकार के सामने सवालों की बाढ़ आ गई है। नरेंद्र मोदी फिटनेस चैलेंज की बात करते हैं तो राहुल गांधी उन्हें पेट्रोल का दाम घटाने की चुनौती दे डालते हैं। चुटकुले भी इसी के इर्द-गिर्द चल रहे हैं। कोई मोटरसाइकिल में पैडल लगवाने की सलाह दे रहा है तो कोई स्कूटर में टंकी फुल कराने पर बीमा कराने जा रहे हैं।

मनमोहन सरकार के समय कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल थी और उस समय पेट्रोल पर कुल 43 फीसदी टैक्स लगता था. मोदी सरकार के कार्यकाल में तो ज्यादातर समय कच्चे तेल की कीमत नरम ही रही है. अब जाकर यह ऊपर की ओर बढ़ रही है. मोदी सरकार के दौर में जनवरी, 2016 में तो कच्चे तेल की कीमत 28 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी. जाहिर है सरकार ने उस दौर में बहुत अच्छी कमाई की और चाहती तो वह इस गिरावट का लाभ जनता को दे सकती थी. इसके उलट सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी ताकि कमाई ज्यादा से ज्यादा हो सके.

सरकार ने पिछले चार साल में नौ बार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क बढ़ाए और सिर्फ एक बार इसमें कटौती की.

सत्ता में आने पर साल 2014-15 में एनडीए सरकार को पेट्रोलियम सेक्टर से मिलने वाला राजस्व 3,32,620 करोड़ रुपये था, 2016-17 में यह बढ़कर 5,24,304 करोड़ रुपये पहुंच गया. वित्त वर्ष 2017-18 के पहले छह महीनों में ही सरकार को पेट्रोलियम सेक्टर से मिलने वाला राजस्व 3,81,803 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो कि 2014-15 के पूरे साल से ज्यादा है.

अगर पेट्रोल का प्राइस बिल्डअप देखा जाए तो डीलरों को पेट्रोल 38.17 रुपए प्रति लीटर की दर पर मुहैया कराया गया। इसमें 19.48 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी और 16.55 रुपए प्रति लीटर का वैट जोड़ा गया। साथ में 3.63 रुपए प्रति लीटर का डीलर कमीशन भी इसमें डाला जाए तो दाम 77.83 रुपए प्रति लीटर पहुंच जाते हैं। कांग्रेस छोड़िए, भाजपा के नेताओं को भी इस मामले की संजीदगी पता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि अगर केंद्र जीएसटी (उत्पाद एवं सेवा कर) पर आम सहमति बना लेता तो पेट्रोल-डीजल के दामों में काफी कमी आ सकती है। 
 

गौरतलब है कि कर्नाटक चुनाव के खत्‍म होने के बाद से ही लगातार बढ़ रहे पेट्रोल और डीजल के दाम 12वें दिन भी अपनी बढ़त बनाए हुए हैं. शुक्रवार को भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में खासा उछाल देखने को मिला. दिल्‍ली छोड़कर चेन्‍नई, मुंबई और कोलकाता जोन में पेट्रोल 80 के पार ही रहा. शुक्रवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 77.83 रुपये थी. मुंबई में यह 85.65 रुपये प्रति लीटर थी. कोलकाता में 80.47 रुपये और चेन्नई में 80.80 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया.

पेट्रोलियम और पेट्रो उत्पादों को 1955 के एक्ट की धारा 2 के तहत आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल किया गया है. दिल्ली में पेट्रोल की रिफाइनरी लागत पर करीब 100 फीसदी तक और डीजल पर करीब 50 फीसदी तक टैक्स लिया जाता है.

एक अनुमान के अनुसार भारत में अल्कोहल वाले पेय का बाजार करीब 4.6 लाख करोड़ रुपये का है. इससे सरकार ने प्रति व्यक्ति 3,415 रुपये का भारी राजस्व हासिल किया.

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