16 साल बाद इरोम शर्मिला तोड़ेंगी अपना भूख हड़ताल, लड़ेंगी विधानसभा चुनाव

आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट यानी AFSPA के विरोध में मणिपुर में पिछले 16 साल से भूख हड़ताल कर रही मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने भूख हड़ताल तोड़ने का फैसला किया है. उन्होंने 9 अगस्त को भूख हड़ताल ख़त्म करने और मणिपुर विधानसभा का चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है. शर्मिला ने कहा, “अफ़्सपा के ख़िलाफ़ वे पिछले 16 सालों से अकेले लड़ रही हैं. किसी सत्ता, राजनीति शक्ति और समर्थन के बिना. उन पर 309 का केस दर्ज किया गया. अब वे चुनाव के माध्यम से अपनी लड़ाई को आगे ले जाएंगी.” उन्होंने कहा, “एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में वे चुनाव लड़ेंगी और और अफ्सपा विरोधी अपनी मुहिम को आगे ले जाएंगी.” इरोम शर्मिला 2 नवंबर 2000 से  अफ्सपा यानि सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल पर हैं।

India’s Irom Sharmila, who has been on a hunger strike for 12 years to protest an Indian law that suspends many human rights protections in areas of conflict, looks during a press conference, in New Delhi, India, Monday, March 4, 2013. Sharmila who has been force fed through a tube by authorities was charged Monday with attempted suicide in a case likely to bring major attention to her quiet protest in the tiny northeastern state of Manipur against the Armed Forces Special Powers Act. (AP Photo/Tsering Topgyal)

 

16 साल से इरोम शर्मिला चानू ने नहीं की बालों में कंघी और न ही देखा आइना

 

इरोम चानू शर्मिला… अफस्फा और सेना के अत्याचारों के खिलाफ पिछले 16 सालों से भूख हड़ताल पर बैंठीं हैं। सोलह साल बाद इरोम शर्मिला ने भूख हड़ताल खत्म कर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. अपने अधिकार और आजादी के लिए भूख हड़ताल पर बैठी मानवाधिकार कार्यकर्ता आयरन लेडी इरोम चानू शर्मिला का जन्‍म 14 मार्च 1972 में हुआ था.. इरोम मणिपुर से आर्म्‍ड फोर्स स्‍पेशल पावर एक्‍ट 1958, जिसे सशस्‍त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटाए जाने की मांग पर  2 नवंबर 2000 से आजतक वो भूख हड़ताल पर हैं. Afspa 1958 में बना एक कानून है जो उत्‍तर-पूर्व के ज्‍यादातर हिस्‍सों और कश्‍मीर में लागू है। यह कानून सुरक्षा बलों को तलाशी और देखते ही गोली मारने का अधिकार देता है।

नवंबर 2000 में इंफाल के पास मालोम में असम राइफल्‍स के जवानों के हाथों 10 लोग मारे गए थे। यह घटना 2 नवंबर की थी। इसके तीन दिन बाद से ही इरोम शर्मिला Afspa को हटाए जाने के लिए अहिंसक आंदोलन कर रही हैं। उन्‍होंने प्रण लिया था कि जब तक यह कानून खत्‍म नहीं करा देंगी, तब तक न बालों को कंघी करेंगी और न आईना देखेंगी। उन्‍हें आत्‍महत्‍या की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और तब से जबरन पाइप के जरिए खिलाया जा रहा है। इरोम का कहना है कि मणिपुर में युद्ध जैसी कोई स्थिति नहीं है कि Afspa लागू रखा जाए।

इस भूख हड़ताल के तीसरे दिन सरकार ने इरोम शर्मिला को गिरफ्तार कर लिया. उन्‍होंने जब भूख हड़ताल की शुरुआत की थी, वे 28 साल की युवा थीं. कुछ लोगों को लगा था कि यह कदम एक युवा ने भावुकता में उठाया है. लेकिन समय के साथ इरोम शर्मिला के इस संघर्ष की सच्चाई लोगों के सामने आती गई. आज वह 44 साल की हो चुकी हैं.  उनके नाम पर अबतक दो रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं. पहला सबसे लंबी भूख हड़ताल करने और दूसरा सबसे ज्‍यादा बार जेल से रिहा होने का रिकॉर्ड दर्ज है. 2014 में अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्‍हें एमएसएन ने वूमन आइकन ऑफ इंडिया का खिताब दिया था. इरोम शर्मिला ने 1000 शब्दों में एक लंबी ‘बर्थ’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी. यह कविता ‘आइरन इरोम टू जर्नी- व्हेयर द एबनार्मल इज नार्मल’ नामक एक किताब में छपी थी. इस कविता में उन्‍होंने अपने लंबे संघर्ष के बारे में बताया है।

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