ISRO के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर की बिल्डिंग में लगीआग ,

इंडियन सपेस रिसर्च ISRO के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (SAC) बिल्डिंग में गुरुवार को आग लग गई थी. इस हादसे में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, मौके पर पहुंची 26 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने जल्द ही आग पर काबू पा लिया था. बिल्डिंग में मौजूद करीब 40 वैज्ञानिक सुरक्षित थे, हालांकि एक CISF का जवान घायल हो गया. ऐसे मामले कम ही सामने आते हैं. इससे पहले 2004 में ही एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी. ये हादसा श्रीहरिकोटा में हुआ था.

अतिरिक्त मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजेश भट्ट ने बताया कि दोपहर लगभग 12 से एक बजे के आसपास लगी आग पर काबू पा लिया गया। यह आग  जोधपुर चार रास्ते के निकट स्थित उच्च सुरक्षा वाले इस केंद्र की एंटेना जांच प्रयोगशाला के भवन में लगी। करीब नौ से दस मीटर ऊंची इस इमारत में लगी आग से धुंआ काफी अधिक उठा। करीब ढाई से तीन हजार वर्ग फुट क्षेत्र में लगी आग को पूरी तरह काबू कर लिया गया। 

इस आग से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन सूत्रों की मानें तो इस हादसे के कारण सेंटर में मौजूद 'एंटीना जांच लैब' को नुकसान पहुंचा है. ये एक हाइ-टेक सिस्टम है, जो कि सैटेलाइट के संचार घटक में इस्तेमाल होता है. गौरतलब है कि ISRO में किसी भी उपकरण की जांच में काफी खर्चा आता है. उन्होंने बताया कि आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। इससे हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। वहीं अहमदाबाद के कलेक्टर विक्रांत पांडेय ने बताया कि आग केंद्र के बड़े परिसर की केवल एक इमारत के एक कमरे तक ही सीमित रही। अग्निशमन टीमों ने न्यूनतम समय में मौके पर पहुंच कर आग पर नियंत्रण की शुरूआत कर दी थी।

सूत्रों के मुताबिक स्पेस से जुड़े कार्यक्रम काफी महंगे होते हैं लेकिन हादसे में जो आग लगी है उससे सैटेलाइट के किसी उपकरण को नुकसान नहीं पहुंचा है.

आग लगने के हादसे की जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक ये ही कहा जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण ही लगी है. SAC की ओर से कहा गया है कि पुलिस आग लगने के मामले की जांच होगी. क्योंकि जिस सुविधा को नुकसान पहुंचा है उसका प्रॉटोकॉल काफी अहम है. पुलिस इस मामले में देखेगी कि क्या इसमें कोई साजिश तो नहीं है. फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम आग लगने के कारण का पता लगाएगी.

हादसे के बाद अभी इस लैब में कामकाज पर रोक लग गई है, फायर डिपार्टमेंट जब इस क्षेत्र को सेफ घोषित करेगा तभी वैज्ञानिक यहां पर काम शुरू करेंगे.

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