कैराना लोकसभा उपचुनाव ने सभी दलों की उड़ा रखी नींद

कैराना लोकसभा उपचुनाव ने सभी दलों की नींद उड़ा रखी है। राष्ट्रीय लोकदल भी इसका अपवाद नहीं है। कैराना लोकसभा उपचुनाव अगर बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है तो रालोद के लिए भी ये साख का सवाल है। 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद का जो हस्र हुआ…उसने रालोद के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। लिहाजा जयंत चौधरी रालोद उम्मीदवार को जिताने के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहते हैं। हालांकि रालोद की उम्मीदवार तबस्सुम हसन को सपा-बसपा का भी समर्थन हासिल है। फिर भी जयंत ने तबस्सुम को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। जयंत अपनी जनसभाओं में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को अपना मुद्दा बना रहे हैं। इसलिए उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान जय किसान को भी बदल दिया है। खुद को किसान हितैषी बताने के लिए रालोद अब तक जय जवान, जय किसान का नारा देती आ रही थी। लेकिन, इस चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी ने नारा बदलते हुए कहा अबकी बार 'जिन्ना नहीं गन्ना चलेगा।' इस नारे के साथ रालोद ज्यादा से ज्यादा किसानों को अपने पाले में करने की कोशिश में लगी हुई है। बीजेपी पर हमला बोलते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि बीजेपी अब तक किसानों को ठगती आई है. किसानों को धोखा दिया गया है. बीजेपी केवल हिंदू और मुस्लिम की राजनीति करती है और किसानों को हमेशा भूल जाती है. वोट लेते वक्त ही उसे किसानों की याद आती है और झूठे वादे करती है. लेकिन, इसबार किसान ऐसा नहीं होने देंगे. इस बार प्रदेश में जिन्ना का मुद्दा काम नहीं आएगा, बल्कि गन्ना का मुद्दा काम करेगा. सत्ता में आने से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि सरकार बनने के दो सप्ताह के भीतर सभी गन्ना किसानों का भुगतान कर दिया जाएगा. शामली जिले में तीन शुगर मिल हैं. इन तीनों मिलों पर गन्ने के भुगतान का करीब 600 करोड़ का बकाया है. रालोद नेताओं द्वारा पाकिस्तान से चीनी खरीद का आरोप लगाए जाने को लेकर प्रदेश के गन्ना मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान से कोई चीनी नहीं मंगवाई जा रही है. हमारे देश के किसानों ने पर्याप्त मात्रा गन्ने का उत्पादन किया है और चीनी की कोई कमी नहीं है।

ब्यूरो रिपोर्ट, समाचार टुडे

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