कर्नाटक चुनाव : क्या होगा येदियुरप्पा का ?

कर्नाटक में चुनाव नतीजे सामने आने के बाद से जारी नाटक और बुधवार के आधी रात के ड्रामे के बाद बुकानकेरे सिद्दलिंगप्पा येदियुरप्पा, यानी बीएस येदियुरप्पा गुरुवार को कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ले ली। मुख्यमंत्री के रूप में यह उनका तीसरा कार्यकाल है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद येदियुरप्पा के शपथ पर लगा ग्रहण तो हट गया…लेकिन उनकी कुर्सी पर लगा ग्रहण अब भी बरकरार है। येदियुरप्पा तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने ज़रूर हैं, लेकिन अब भी उनके सामने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अलावा बहुमत साबित करने की चुनौती है, जो काफी टेढ़ी खीर प्रतीत होती है। इन सबसे इतर कर्नाटक में एक अजीब किस्म के दुर्भाग्य की चर्चा चल रही है। येदियुरप्पा का ये ख़तरनाक दुर्भाग्य है उनका अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाना। इससे पहले भी वो दो बार कर्नाटक में सीएम पद की शपथ ले चुके हैं लेकिन इसे उनका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वो अब तक एक बार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं। येदियुरप्पा पहली बार 12 नवंबर, 2007 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन आठवें ही दिन गठबंधन के साझीदार दल जेडीएस से मतभेद के कारण उन्हें 19 नवंबर, 2007 को उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में BJP को शानदार जीत मिली, और येदियुरप्पा 30 मई, 2008 को दूसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन गए। लेकिन इस बार भी उनका दुर्भाग्य उनके आड़े आ गया। इस कार्यकाल के दौरान उन पर राज्य के लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के मामलों में उनका नाम लिया, और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के ज़ोरदार दबाव की वजह से उन्होंने 31 जुलाई, 2011 को पद से इस्तीफा दे दिया… अब तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने ज़रूर हैं, लेकिन अब भी उनकी कुर्सी पर लगा ग्रहण बरकरार है। उनके सामने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अलावा बहुमत साबित करने की चुनौती है, जो काफी टेढ़ी खीर प्रतीत होती है। अगर कांग्रेस और JDS के विधायक एकजुट बने रहे, तो उनके लिए बहुमत जुटाना बिल्कुल असंभव होगा, क्योंकि इन दोनों पार्टियों के पास कुल 116 विधायक हैं, और उनका दावा एक निर्दलीय विधायक के समर्थन का भी है… सो, अगर ये 117 विधायक एकजुट रहे, तो बाकी बचे 105 विधायकों से किसी भी तरह बहुमत साबित नहीं किया जा सकेगा, और येदियुरप्पा  को एक बार फिर कार्यकाल पूरा किए बिना गद्दी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वैसे भी कहा गया है कि तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा…कहना गलत नहीं होगा कि येदियुरप्पा के लिए अपना तीसरा कार्यकाल पूरा करना किसी अग्निपथ से कम नहीं होगा…अग्निपथ…अग्निपथ…अग्निपथ।

ब्यूरो रिपोर्ट, समाचार टुडे

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