कर्नाटक : जानिऐ अचानक क्यों बदली कुमारस्वामी के शपथग्रहण की तारीख

कर्नाटक में सीएम बीएस येदियुरप्पा को महज ढाई दिन में इस्तीफा दिलवाने से उत्साहित कांग्रेस अब विपक्षी खेमे को बुलाकर शक्ति प्रदर्शन करने के मूड में है. कर्नाटक में सोमवार को जेडीएस नेता कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. वह शाम को राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलकर उन्हें विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपेंगे.

भले ही कर्नाटक में काग्रेस का सीएम न हो, पर इस राज्य में बीजेपी के साथ हुई लड़ाई में वह सीएम पद पाने से कहीं बड़ा राजनीतिक संदेश देने में सफल रही है. फिलहाल कांग्रेस के सामने राज्यों में सत्ता पाने से बड़ा लक्ष्य 2019 का है. बीजेपी चाहती है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ गठबंधन का नेतृत्व करती हुई दिखे और इसके लिए वह राज्यों में कुर्बानी देने को भी तैयार है. इसलिए वह कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में किसी को भी नहीं छोड़ना चाहती है.

बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई को शपथ ली थी, लेकिन पिछले 5 दिनों से चल रही लंबी कवायद और बीजेपी सरकार ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया और बीएस येदियुरप्पा ने संख्याबल जुटाने से पहले इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया.

कर्नाटक चुनाव परिणाम आने के बाद हुए बहुमत साबित करने के नाटकीय घटनाक्रम में बीजेपी की हार के बाद अब कर्नाटक में कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन की सरकार बनेगी। शनिवार को हुए फ्लोर टेस्ट में बहुमत के लिए जरूरी विधायक संख्या न होने के चलते बीजेपी की ओर से सीएम येदयुरप्पा ने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद गठबंधन ने एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई में राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। कुमारस्वामी को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया गया है। वह बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। 

येदियुरप्पा के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद जदएस-कांग्रेस-बसपा गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार एच डी कुमारस्वामी ने राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात की और उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 21 मई को शपथ ग्रहण करेगी.

इसके बाद उन्होंने कहा कि नयी सरकार अब 21 मई की बजाय 23 मई को शपथ लेगी. उन्होंने तारीख में परिवर्तन का कारण नहीं बताया है.  

वहीं जेडीएस के एक नेता ने कहा कि 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि होती है इसलिए शपथ ग्रहण की तारीख में परिवर्तन किया गया है. 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कर्नाटक में तीन दिन पुरानी भाजपा सरकार के नाटकीय घटनाक्रम में गिर जाने को ‘‘ क्षेत्रीय मोर्चे की जीत ’’ बताया. 

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख को नामित मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने फोन कर बुधवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया है. दरअसल ममता बनर्जी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का मुकाबला करने के लिए संघीय मोर्चा बनाने का विचार दिया है.

कर्नाटक में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में ममता जद एस प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, उनके बेटे कुमारस्वामी और अन्य प्रमुख नेताओं के संपर्क में रही हैं. 

शक्ति परीक्षण का सामना किए बगैर येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद तृणमूल प्रमुख ने देवेगौड़ा , कुमारस्वामी और कांग्रेस को बधाई भी दी थी. 

जदएस प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के 58 वर्षीय बेटे ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया है लेकिन उन्होंने कहा, ‘‘हमें 15 दिनों की जरूरत नहीं है.’’ 

कांग्रेस- जद(एस) गठबंधन ने 224 सदस्यीय विधानसभा में 117 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. दो सीटों पर विभिन्न कारणों से मतदान नहीं हुआ था जबकि कुमारस्वामी दो सीटों से चुनाव जीत थे. 

भाजपा द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों के बीच कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरू के बाहर एक रिजार्ट ले गई जबकि जदएस के विधायक राज्य की राजधानी में एक होटल में रहे. 

इसके बाद उन्हें हैदराबाद के एक होटल ले जाया गया और कांग्रेस-जदएस की याचिका पर बहुमत साबित किये जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विधायक वापस लौटे. 

बीच कांग्रेस ने एक ऑडियो टेप जारी किया जिसमें मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा एक विधायक को कथित रूप से प्रलोभन देते हुए कहते सुने गये कि यदि वह विश्वास मत के दौरान भाजपा सरकार का समर्थन करते है तो उन्हें मंत्री पद दिया जायेगा. 

इस तरह के आरोप भी लगाये गये कि कांग्रेस विधायक आनंद सिंह को भाजपा ने ‘‘बंधक’’ बना लिया लेकिन वह येदियुरप्पा के अपना भाषण शुरू करने से कुछ मिनट पहले विधानसभा पहुंच गये.

सूत्रों ने बताया कि पार्टी जानती थी कि येदियुरप्‍पा जरूरी संख्‍या नहीं जुटा पाएंगे, और इन परिस्थितियों में वह विश्‍वात मत जीतने के प्रति लगातार निराश हो रही थी और कम से कम नैतिक स्‍तर पर खुद को बचाए रखना चाहती थी.

सूत्रों के मुताबिक येदियुरप्‍पा के पास शनिवार सुबह ही यह संदेश पहुंचा. जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सबसे अच्‍छा तरीका है लाइव स्‍ट्रीमिंग, तभी विश्‍वास मत से ठीक पहले नाटकीय इस्‍तीफे और भाषण की तैयारी शुरू हो गई थी.

कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाईवाला से मुलाकात करने के बाद कुमारस्वामी मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा, 'हमें पता है कि बहुमत साबित करने के लिए हमारे पास पर्याप्त विधायक हैं और सभी विधायक शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा होंगे।' कुमारस्वामी ने कहा, 'हमने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया है और बुधवार को शपथ ग्रहण होगा। सभी से चर्चा के बाद मंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा।' उन्होंने कहा, 'राज्यपाल की ओर से बुलाए जाने के बाद हमने दावा पेश किया है। बुधवार को 12 बजे से 1 बजे के बीच शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा। मैंने इसमें सभी क्षेत्रीय दलों के नेताओं को आमंत्रित किया है।' 

कुमारस्वामी ने कहा, 'मैं देश की न्याय व्यवस्था को बधाई और धन्यवाद देता हूं जिसने लोकतंत्र की रक्षा की और हमारा सहयोग किया।' उन्होंने कांग्रेस नेताओं पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा बीएसपी सुप्रीमो मायावती को भी सरकार बनाने में सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जल्द ही बाकी चीजें भी स्पष्ट होंगी। माना जा रहा है कि कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह को 2019 से पहले विपक्षी एकता का बड़ा शो बनाने की तैयारी है और विपक्ष के तमाम बड़े नेता इसमें हिस्सा लेने पहुंच सकते हैं। 

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