यादों की रह गुजर में कांटे बिछा रहा हु !

यादों की रह गुजर में कांटे बिछा रहा हु !

मेरा होसला तो देखो तुमको  भुला रहा हुँ !

 

मंजिल ना कोई रहबर फिर भी हुँ मै सफर में !

आवारगी को  अपनी  आखिर   थका   रहा हुँ !

 

एक नाम लिख  दिया था खमोश   पानियो पर !

अब फेंक कर  के  पत्थर  उसको  हिला  रहा हुँ  !

 

पल पल जवां किये थे पलकों में वो  जो सपने !

खुद क़त्ल करके  उनको  जादर  उढ़ा  रहा  हुँ !

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नाम : साबिर अली ‘धानवी’
परिचय : साबिर अली यूपी के सहारनपुंर जिले के घाना खंडी के रहने वाले है। सन् 1969 में जन्मे साबिर अली पेषे से अध्यापक है। साबिर अली ने सन् 1990 से लेखन की दुनिया में कदम रखा। बिसरी यादें के नाम से धानवी साहब की किताब भी प्रकाषित हो चुकी है। उपरोक्त अंष उसकी किताब से     लिया गया है।

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