मोदी सरकार के इस कदम से डूब सकती है LIC के 38 करोड़ पॉलिसी धारकों की कमाई

देश की सबसे बड़ी कंपनी जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बैंकिंग क्षेत्र में उतर सकती है। इसके लिए कंपनी की निगाह आईडीबीआई बैंक की बड़ी हिस्सेदारी पर है। 
सूत्रों ने कहा कि बैंक का बही खाता दबाव वाला है, लेकिन इससे एलआईसी को कारोबारी दृष्टि से तालमेल में मदद मिलेगी। आईडीबीआई बैंक पर भारी डूबे कर्ज का बोझ है और सरकार बैंक के पुनरोद्धार का प्रयास कर रही है। संभावना है कि एलआईसी अपने आवास वित्त और म्यूचुअल फंड कारोबार की तरह आईडीबीआई बैंक को भी सहायक इकाई बना ले।

साल के शुरुआत में बैंकों को एनपीए से मुक्त कराने के लिए जनवरी में केन्द्र सरकार ने 2.1 लाख करोड़ रुपये के रीकैपेटलाइजेशन प्रोग्राम को मंजूरी दी. वहीं अब वह सर्वाधिक एनपीए अनुपात वाले IDBI  बैंक को देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के हवाले करने की तैयारी में है.

एलआईसी में देश की अधिकांश जनता की जमा-पूंजी है और वह प्रतिवर्ष अपनी बचत से हजारों-लाखों रुपये निकालकर एलआईसी की पॉलिसी में डालता है. इस पैसे के सहारे उसका और उसके परिवार का भविष्य सुरक्षित रहता है. लेकिन अब केन्द्र एक सरकारी बैंक को बचाने की कवायद में इसे एलआईसी के हवाले करने जा रही है. इसका साफ मतलब है कि आप प्रतिवर्ष जो पैसा एलआईसी की पॉलिसी के लिए बतौर प्रीमियम जमा करते हैं अब उसका इस्तेमाल बैंक को डूबने से बचाने के लिए किया जाएगा.

बीते कुछ वर्षों के दौरान बैंकिंग सुधार के नाम पर केन्द्र सरकार ने बीमार पड़े सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को कम करने की रणनीति पर काम किया है. इस रणनीति के तहत IDBI से हिस्सेदारी कम करना केन्द्र सरकार के लिए सबसे आसान है क्योंकि IDBI बैंक नैशनलाइजेशन एक्ट के तहत नहीं आता और हिस्सेदारी कम करने में उसे किसी तरह की कानूनी अड़चन का सामना नहीं करना पडेगा.

खराब हालत में चल रहा है जिसका घाटा पिछले वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही में 5663 करोड़ रहा था और कुल एनपीए 55588.26 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार और उसके वित्त मंत्रालय के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण देश में गंभीर स्थिति बन रही है। इसे दबाने के लिए मोदी सरकार एलआईसी को आईडीबीआई बैंक खरीदने के लिए मजबूर कर रही है जबकि उसे बैंक में पूजी निवेश करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि सरकार 38 करोड़ एलअईसी पालिसीधारकों की गाढी कमाई खतरे में क्यों डालना चाहती है।

वहीं खुद एलआईसी बैंकिंग में एंट्री के लिए पूर्व में न सिर्फ IDBI बल्कि लगभग सभी सरकारी बैंकों में कुछ हिस्सेदारी खरीद के बैठी है. लिहाजा, मौजूदा समय में जब केन्द्र सरकार बैंकिंग सुधार के नाम पर IDBI की हिस्सेदारी छोड़ने की कवायद कर रही है तो एलआईसी के लिए भी मौका खुद के लिए एक बैंक तैयार करने का है.

आईडीबीआई बैंक एनपीए की समस्या से जूझ रहा है। मार्च तिमाही के अंत तक बैंक का डूबा कर्ज 55,600 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है। तिमाही के दौरान बैंक का शुद्ध घाटा 5,663 करोड़ रुपये रहा। बैंक का बाजार पूंजीकरण करीब 23,000 करोड़ रुपये का है। उसकी रीयल एस्टेट परिसंपत्तियां और निवेश पोर्टफोलियो अनुमानित 20,000 करोड़ रुपये है। 

 

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