पटना महाभोज से पहले NDA में फूट, नहीं मिटी एनडीए दलों के दिलों की दूरी

केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने पर बिहार एनडीए ने गुरुवार को सहभोज का आयोजन किया। मकसद था दलों के बीच हाल के दिनों की बयानबाजी से बढ़े तनाव को डिनर डिप्लोमेसी के जरिए कम करना। भोज पर जदयू, लोजपा, भाजपा और रोलासपा के नेता जुटे तो जरूर लेकिन लजीज खाना भी दलों के नेताओं के दिलों की दूरी और पार्टी लाइन पर हो रही दावेदारी को मिटा नहीं पाया।

उपचुनावों के नतीजे के बाद एनडीए में सीटों को लेकर घमासान शुरू हो चुका है. बिहार में इस खींचतान को रोकने के लिए गुरुवार को एनडीए के साथियों के लिए बीजेपी की तरफ से महाभोज रखा है. लेकिन केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP)के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस बैठक में शामिल नहीं होंगे. जो कि बीजेपी की चिंता बढ़ा सकता है.

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से बिहार की सियासत में बीजेपी और सहयोगी दलों में वाकयुद्ध चल रहा है। पहले जेडीयू ने कहा कि राज्य में नीतीश एनडीए के चेहरा होंगे तो बाद में एलजेपी ने भी अपना दावा ठोक दिया। गुरुवार को एनडीए के एक अन्य सहयोगी और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने और बगावती तेवर अपना लिए। कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी ने यहां तक मांग कर दी कि एनडीए उपेंद्र कुशवाहा को बिहार का सीएम पद का उम्मीदवार बनाए। 
कुशवाहा का कहना है कि उनकी स्टेट लीडरशिप नहीं बल्कि केंद्रीय लीडरशिप से बातचीत है. वह बिहार के प्रेसिडेंट से बात नहीं करते हैं. कुशवाहा की मांग है कि बैठक एनडीए की बुलाई जानी चाहिए. जो कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अमित शाह बुलाते हैं.  

गौरतलब है कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मोदी सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बीजेपी ने एनडीए के अपने सभी सगयोगी दलों को आज शाम पटना आमंत्रित किया है. इस बैठक और रात्रि भोज में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत करीब 1000 नेता शामिल होंगे.

दरअसल, बिहार में बीजेपी-जेडीयू के साथ सरकार बनने के बाद यह पहला मौका है जब एनडीए के नेताओं की बैठक हो रही है. इसका मुख्य मकसद आपसी एकजुटता दिखाना है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान समेत बीजेपी के भूपेंद्र यादव, डिप्टी सीएम सुशील मोदी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, अरुण कुमार समेत सभी सांसद, विधायक, विधान पार्षद, प्रदेश पदाधिकारी और सभी घटक दलों के जिलाध्यक्ष महाभोज में शामिल हो सकते हैं.

उपेंद्र कुशवाहा की गैर-मौजूदगी के बावजूद रालोसपा नेता नागमणि और एमएलए ललन पासवान ने भोज में जाकर बिहार एनडीए में सबकुछ ठीक-ठाक होने का मैसेज देने की कोशिश की। लेकिन, बात जैसे ही नेतृत्व पर आई तो नागमणि ने कहा कि अगला चुनाव उपेंद्र कुशवाहा को सीएम बनाने के नाम पर लड़ा जाना चाहिए। इतना सुनते ही जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक बोले- कौन क्या बोल रहा है, इससे हमें कोई लेना-देना नहीं है? हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि बिहार के 12 करोड़ लोग नीतीश को ही सीएम देखना चाहते हैं।

आपको बता दें कि हाल ही में उपचुनावों की हार के बाद सहयोगियों ने बीजेपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था. सबसे पहले जेडीयू ने 25, रामविलास पासवान ने 7 सीटों की मांग की थी. इसके अलावा कुशवाहा ने भी जल्दी और सम्मानजनक सीटों की बात की थी.

 

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