रास्ता ना देने पर, तालाब से निकली दलित की अर्थी

कालाहांडी और बालासोर में एंबुलेंस या मोर्चरी वाहन न मिलने के चलते लाश के साथ अमानवीय व्यवहार की घटना दो दिनों से सुर्ख़ियों में बनी हुई है। उधर मध्य प्रदेश के पनागर तहसील से दबंगों द्वारा जातिगत भेदभाव का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां दबंगों ने कथित तौर पर दलित समुदाय से संबंध रखने वाली शवयात्रा को अपने खेत से नहीं गुजरने दिया। बाद में परिवार को मजबूर होकर तालाब के रास्ते शवयात्रा निकालनी पड़ी।

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बता दें, कि बारिश होने के चलते शमशान घाट तक जाने वाली कच्ची सड़क डूब गयी थी और वहां तक पहुंचने के लिए सिर्फ दबंगों के खेत से गुजर कर जाना पड़ता। ऐसे में ऊंची जाति से ताल्लुक रखने वाले इन दबंगों ने अर्थी को खेत में से ले जाने देने से साफ़ इनकार कर दिया। जिसके बाद मृतक के परिजनों को तालाब के रास्ते शव यात्रा निकालनी पड़ी। बताया जा रहा है कि, दबंग जिस खेत को अपनी जमीन बता रहे हैं वो असल में सरकारी जमीन है और उन्होंने इस पर जबरन कब्जा जमाया हुआ है। मामले के बारे में जब जबलपुर कलेक्टर से बात की गई तो उन्होंने इसे आपसी रंजिश का मामला बता दिया। उनके मुताबिक दबंग और मृतक का परिवार एक ही जाति से ताल्लुक रखते हैं।

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इससे पहले खबर आई थी कि ओडिशा के पिछड़े जिले कालाहांडी में एक आदिवासी को अपनी पत्नी के शव को अपने कंधे पर लेकर करीब 10 किलोमीटर तक चलना पड़ा। उसे अस्पताल से शव को घर तक ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल सका था। इसके आलावा बालासोर में एक 80 वर्षीय औरत के मृत शरीर की हड्डियां तोड़कर और बांस पर बांधकर उसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।

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