बरेली में पंचायत ने महिला को सुनाया तुगलकी फरमान, देखे क्या है पूरा मामला

यूपी के बरेली जिले में एक महिला को पंचायत ने ऐसा तुगलकी फरमान सुनाया है… जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे…. जी हां…. पंचायत ने कहा है कि अगर महिला को अपने बच्चे पर अधिकार चाहिए तो उसे महीने के पहले 15 दिन अपने पहले पति के साथ गुजारने होंगे और बाकी के 15 दिन अपने दूसरे पति के साथ…. यानि पंचायत ने सीधे तौर पर इस अबला नारी को दो मर्दों के बीच दिनों के हिसाब से बांट दिया है…. कमाल तो इस बात का है कि मुंह से ठायं-ठायं करने वाली यूपी की बहादुर पुलिस भी इस अबला की नहीं सुन रही है… क्या है पूरा मामला… आइए बताते हैं आपको सिलसिलेवार तरीके से

ये उत्तर प्रदेश के बरेली थाना क्षेत्र के रहने वाली अर्शी है….. अर्शी अपने परिवार में बेहद खुश थी लेकिन अर्शी के पहले पति ने उसकी जिंदगी एक बार फिर नरक बना दी|  दरअसल मामला ये है कि  अर्शी ने चार साल पहले बहेड़ी थाना क्षेत्र के रहने वाले लईक नाम युवक से शादी की थी… लेकिन पति से प्रताड़ित होने के चलते अर्शी 2साल पहले ही अपने बच्चे को साथ लेकर पिता के घर रिछा वापस चली आई। वही महिला ने अपने बच्चे की जिंदगी को संभालने के मकसद से किसी अन्य व्यक्ति से शादी कर ली। कुछ दिन पहले महिला का पहला पति उसके बच्चे को उठा ले गया।

अर्शी ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत की… लेकिन पुलिस ने मामले को ठन्डे बस्ते में डाल दिया | इसके बाद महिला ने मामले को सुलझाने के लिए लईक के परिचतों से बात की… इसके बाद पंचायत हुई और पंचों ने ये फैसला सुनाया कि महिला 15 दिन अपने पहले पति के साथ रहे और बाकी के दिन अपने दूसरे पति के साथ रहे। इस फरमान के बाद अर्शी असमंजस में है| अर्शी हर हालत में अपने पहले पति से अपने बच्चे की वापसी चाहती है| अर्शी का कहना है कि वह कोई चीज नहीं कि उसकी जिंदगी को दो मर्दो के बीच बाँट दिया जाये

अर्शी के अनुसार अगस्त में लईक उसके बच्चे को छीनकर ले गया… तब उसने अपने पहले पति से समझौता करने की कोशिश की… लेकिन वह नही माना… तब लईक से जुड़े लोगों ने पंचायत की… अर्शी का कहना है वह अपने दूसरे पति के साथ खुश है और उसी के साथ अपनी जिंदगी गुजरना चाहती है। लेकिन उसका पहला पति उसकी जिंदगी नरक बनाना चाहता है। अर्शी ने बताया कि उसने अपने पहले पति की शिकायत एसएसपी से मिलकर की थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाही नही की।

अर्शी परेशान होकर समाज सेविका निदा खान से मिली और पूरे मामले में मद्दद करने की गुजारिश की। वही आलाहजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान का कहना कि अर्शी की पुलिस मदद नही कर रही है जबकि पहले से उसकी जिंदगी दुखदायी है। उसकी जिंदगी को दो मर्दों के बीच बांटी जा रही है। वह खुद अर्शी के लिए एसएसपी मुनिराज जी से मिलेंगी… हालांकि इस मामले में एसपी ग्रामीण का सतीश कुमार का कहना है कि पीड़िता अभी तक उनसे नहीं मिली है

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बहरहाल…. बेबस और लाचार अर्शी की मदद के लिए निदा खान ने हाथ आगे बढ़ाए हैं…. अब देखने वाली बात होगी कि अर्शी को कब तक इंसाफ मिलता है…. ऐसे में सवाल उठने भी लाजिमी है कि आखिरकार दुनिया के सबसे बड़े लोक तात्रिक देश में आज भी पंचायतें कैसे बेलगाम है…. पंचायत कैसे इस तरह के बेतुके फरमान सुना रही है? इन पर कानून का शिकंजा क्यों नहीं है…. सवाल ये भी है कि एनकाउंटर के दौरान मुंह से ठायं-ठायं करने वाली यूपी की बहादुर पुलिस को इस तरह की अबलाओं की गुहार क्यों सुनाई नहीं देती? देखने वाली बात ये भी होगी कि पुलिस इस तरह का तुगलकी फरमान सुनाने वाली पंचायत के खिलाफ क्या एक्शन लेती

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