पानी में जनता, गोद में ‘शिवराज’…पुलिसकर्मियों की गोद में बैठकर पार किया नाला

मध्य प्रदेश पिछले कई महीनों से बाढ़ का क़हर झेल रहा है। ख़ासकर विंध्याचल का इलाका तो बुरी तरह प्रभावित है। सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उस क्षेत्र के दौरे पर हैं. शिवराज रविवार को पन्ना के बाढ़ प्रभावित इलाके में थे। इस दौरान एक नाले के उफान पर होने के कारण उन्होंने होमगार्ड के जवानों की गोद में बैठकर नाला पार किया।

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इस तस्वीर को देखने के बाद आप इतना तो समझ ही गए होंगे कि क्या माजरा है… अगर नहीं तो हम बताते हैं…इस तस्वीर में शिवराज होमगार्ड के दो जवानों की गोद में बैठकर नाला पार कर रहे हैं… ये तस्वीर पन्ना जिले के कमतना और सिगोड़ा गांव के बीच पड़ने वाले कड़वानी नाले की है. दरअसल शिवराज मध्य प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाके के दौरे पर हैं…सतना और रीवा का दौरा करने के बाद वे पन्ना के दौरे पर थे। जब वे इस नाले से होकर गुजर रहे थे…नाले के उफान पर होने की वजह से सीएम का काफिला यहां थम गया था। इसके बाद सीएम ने खुद नाला पार करने का फैसला किया। लेकिन सीएम के साथ चल रहे काफिले में से दो होमगार्ड के जवानों ने उन्हें गोद में बिठा कर नाला पार कराने की पेशकश की…और शिवराज ने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनकी बात मान ली और गोद में बैठकर नाला पार कर लिया।

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कमाल की बात देखिए…नाले में घुटने से भी नीचे पानी था…यानी कोई भी इंसान आसानी से नाला पार कर सकता था…उसी नाले में उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बिना किसी हिचक और डर के आराम से नाला पार कर लिया…लेकिन शिवराज ये जोखिम नहीं ले सके…और गोद में बैठकर आराम से नाला पार किया। घुटने के नीचे से भी जिस पानी से गुजरने का साहस शिवराज नहीं जुटा सके…उससे भी ज्यादा-ज्यादा पानी में उनकी जनता रहने को और चलने को मजबूर है… इसी जनता को तो वे देखने गए थे। इसलिए शिवराज ने किसी भी किस्म का जोखिम लेना उचित नहीं समझा…और चुपचाप होमगार्ड के जवानों की बात मानकर उनकी गोद में बैठ गए और नाला पार कर लिया। नाला पार करने के बाद शिवराज बाढ़ प्रभावित इलाके में जाकर लोगों से मिले…हालात का जायजा लिया…मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया…बाढ़ से प्रभावित होने वाले कच्चे मकानों से लेकर मुर्गा-मुर्गी तक के लिए मुआवजे की घोषणा की…शिवराज बबलू मार्टिन की मां से भी मिले और उन्हें ढांढस बंधाया। ये वही बबलू मार्टिन थे…जिन्होंने सतना के लोगों को बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी।

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दरअसल भारी बारिश की वजह से सतना के मैहर में मौजूद एक बिल्डिंग गिर पड़ी. बिल्डिंग जब ढ़ह रही थी तब लोगों को बचाने के लिए बबलू मार्टिन अपनी जान की परवाह किए बगैर दौड़ पड़े. इमारत में मौजूद एक बच्चे की जान तो उन्होंने बचा ली लेकिन खुद को ना बचा पाए. लेकिन शिवराज घुटने से भी नीचे पानी में चलने का जोखिम न ले सके…ये वही शिवराज हैं जो खुद को साधारण आदमी कहते हैं और राजा-सामंतों की निंदा करते नहीं थकते हैं। लेकिन खुद के पानी में पैर रखने की बात आई तो चुपचाप पुलिसवालों की गोद में बैठकर नाला पार कर लिया। जब चले भी तो…अपने जूते को सुरक्षाकर्मियों के हाथों में थमा दिया…ताकि वो पानी में गीला न हो जाए। विलियम शेक्सपीयर कह गए थे कि नाम में क्या रखा है…आप सोच रहे होंगे कि शेक्सपीयर के इस कथन का शिवराज से क्या सम्बन्ध है…तो इसका जवाब भी शिवराज के नाम में ही है।

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शिवराज सिंह चौहान…शिवराज यानी साक्षात् भगवान शिव का राज…सिंह यानी वनराज शेर…और चौहान शब्द तो खैर पृथ्वीराज चौहान के कारण वीरता का पर्याय माना जाने लगा…एक शिव वो थे…जिन्होंने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को देवताओं की भलाई की ख़ातिर चुपचाप पी लिया और नीलकंठ कहलाए…एक शिव ये हैं जो समंदर तो दूर…घुटने से भी नीचे पानी में चलने का जोखिम नहीं उठा सके…सिंह जो अपनी गर्जना से ही सबको भयभीत कर देता है…परिस्थितियां चाहे कैसी भी क्यों न हो वो पीठ नहीं दिखाता है…एक सिंह ये हैं…जो थोड़े से पानी से घबरा गए और गोद में बैठकर नाला पार करना ही उचित समझा…एक चौहान यानी पृथ्वीराज चौहान वे थे जिन्होंने मोहम्मद गोरी को भी हराया था…और जब तराइन के दूसरे युद्ध में हारे भी तो वीरों की तरह लड़ने के बाद…एक चौहान ये हैं जो घुटने भर पानी में चलने का साहस भी न जुटा सके…याद कीजिए…2008 में दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के दूसरे दिन मीडिया के सामने तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटिल कपड़े बदलने में व्यस्त थे…उस दिन उन्होंने दिन में तीन बार कपड़े बदले थे…और इस बात का ख़ास खयाल रखा था कि वे हर बार अलग परिधान में नजर आएं। ये इत्तेफाक ही है कि वो भी शिवराज थे और ये भी शिवराज…।

समाचार टुडे के लिए रितेश झा की रिपोर्ट।

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