आने वाले दिनो में हो सकती है पेट्रोल-डीजल के दामो में बढ़ोतरी

हिंदुस्तान पेट्रोलियम के चेयरमैन एम के सुराणा ने कहा कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें में अगर बढ़ोतरी जारी रही तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा करना मजबूरी होगी. उन्होंने कहा कि तेल कारोबारी कंपनियों ऑयल के पास पेट्रोल और डीजल के ऊंचे दाम का बोझ उपभोक्ताओें के कंधों पर डालने का कोई विकल्प नहीं होगा. बैंक के मुताबिक ओपेक देशों की ओर से उत्पादन को सीमित किया जा सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते भी कीमतों में इजाफा हो सकता है। बैंक के मुताबिक यदि कीमतों में उछाल जारी रहा तो 2014 के बाद यानी करीब 5 साल के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर जाएगी। 
 

क्रूड ऑइल की कीमतें पहले ही तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर एक बार फिर से प्रतिबंध लगाने का फैसला लेना है। इसके चलते ईरान ने पहले से ही सप्लाइ की कमी से जूझ रहे क्रूड मार्केट को झटका देते हुए उत्पादन में कमी करने की चेतावनी दी है। ओपेक देशों के सप्लाइ कट के फैसले और वेनेजुएला में उत्पादन में अचानक कमी के चलते पहले ही कीमतों में तेजी का दौर जारी है। 
 

उन्होंने कहा कि ईरान पर प्रतिबंधों से भारतीय तेल शोधकों पर पूरा असर तुरंत नहीं पड़ेगा. हालांकि इस बार ईरान पर पिछले बार के प्रतिबंध से पैदा हुई स्थिति अलग होगी, क्योंकि यूरोपियन यूनियन के ईरान के साथ कई व्यापार समझौते हैं. उन्होंने कहा कि रिफाइनर्स के लिए सबसे अहम पहलू तेल की आपूर्ति है और भारत के पास इसके दूसरे स्रोत उपलब्ध हैं. 

 

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें  आयात पर निर्भर पड़ोसी देशों के मुकाबले क्रमश: 16.35 रुपये तथा 15.15  रुपये प्रति लीटर ऊंची है.

 

पेट्रोल और डीजल की मुद्रास्फीति सूचकांक में 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है. खुदरा दरों में कमी नहीं होने से आम लोगों की क्रय शक्ति कम होती है और जीडीपी प्रभावित होता है.

विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल के बढ़ते दामों का अगले हफ्ते महंगाई के आंकड़ों पर असर दिखाई देगा। अगर अप्रैल में महंगाई बढ़ने के नतीजे आते हैं तो जून में रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा बैठक अहम होगी, जिसमें ब्याज दरों पर फैसला होगा। विदेशी संस्थागत निवेशकों और फंड द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार पैसा निकालने से रुपए पर दबाव बढ़ रहा है। तेल विशेषज्ञ कंपनी कांसंटन फ्रिट्सेच का कहना है कि अमेरिका से तेल उत्पादन में उछाल आया है, लेकिन वेनुजुएला की नाजुक स्थिति इस बढ़त को खत्म कर रही है। वेनेजुएला का उत्पादन वर्ष 2000 की तुलना में 50 फीसदी यानी आधा रह गया है। अगर अमेरिका प्रतिबंध लगाता है तो ईरान के तेल उत्पादन में करीब दो-तीन लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती होना तय है।

 

 

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com