पेट्रोल-डीजल लाया जा सकता है जीएसटी के तहत, टैक्स नहीं होगा कम

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने की चारो तरफ मांग के बीच यह संकेत दिया गया है कि इस मुद्दे पर आम सहमति बनती है तो ईंधन पर जीएसटी किस तरह वसूला जाएगा। हालांकि, उन्होंने प्राकृतिक गैस और एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की स्पष्ट समयसीमा के बारे में कुछ नहीं बताया. केरोसीन, नाफ्था और एलपीजी जैसे पेट्रोलियम उत्पाद पहले से ही जीएसटी के दायरे में हैं जबकि पांच उत्पादों… कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, विमान ईंधन, डीजल तथा पेट्रोल को फिलहाल जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है. रस्तोगी ने कहा, ‘‘ पेट्रोलियम न केवल केंद्र का बल्कि राज्य के राजस्व का बड़ा स्रोत है. प्राकृतिक गैस के मामले में इसे जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर थोड़ी सहमति है. इसीलिए यह पहला पेट्रोलियम उत्पाद हो सकता है जिसे जीएसटी के दायरे में लाया जाए.’’ 
28 फीसदी जीएसटी और वैट को मिलाकर टैक्स मौजूदा दर के बराबर हो जाएगा। अभी केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारें वैट वसूल करती हैं। 
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाए जाने से पहले सरकार को यह तय करना है कि क्या वह 20 हजार करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट छोड़ने को तैयार है, जो पेट्रोल डीजल को जीएसटी के बाहर रखे जाने की वजह से उसकी जेब में आ रहा है। जीएसटी को 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। 
जीएसटी क्रियान्वयन से करीब से जुड़े अधिकारी ने नाम जाहिर ना करने की शर्त पर बताया, 'दुनिया में कहीं भी पेट्रोल-डीजल पर शुद्ध रूप से जीएसटी लागू नहीं है, इसलिए भारत में भी यह जीएसटी और वैट का मिश्रण होगा।' 

उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाए जाने का समय राजनीतिक स्तर पर तय होगा, केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर यह फैसला करेंगी। 

इस समय केंद्र 1 लीटर पेट्रोल पर 19.48 रुपये और डीजल पर 15.33 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूल रहा है। इसके ऊपर राज्य वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) लगाते हैं, जो अंडमान निकोबार में सबसे कम 6 फीसदी (सेल्स टैक्स) है और मुंबई में पेट्रोल पर सर्वाधिक 39.12 फीसदी है। तेलंगाना डीजल पर सर्वाधिक 26 फीसदी वैट वसूल कर रहा है। दिल्ली में पेट्रोल पर 27 फीसदी और डीजल पर 17.24 फीसदी वैट है। पेट्रोल पर कुल 45-50 फीसदी और डीजल पर 5-40 फीसदी टैक्स लगता है। 

जीएसटी पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए रस्तोगी ने यह भी संकेत दिया कि सरकार का संभवत: जीएसटी के अंतर्गत ‘आपूर्ति’ शब्द की परिभाषा की समीक्षा का भी इरादा है. कर को लेकर अग्रिम नियम (एडवांस रूलिंग) तय करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हाल में कुछ राज्यों में संबंधित पक्षों को इस मामले में विरोधाभासी व्यवस्था दी है.इसीलिए जीएसटी से संबंधित प्रासंगिक मुद्दों के समाधान के लिये केंद्रीकृत एडवांस रूलिंग प्राधिकरण के गठन को लेकर नीतिगत निर्णय हो सकता है.
उन्होंने आगे कहा, 'केंद्र के पास राज्य सरकारों के राजस्व में आने वाली कमी को पूरा करने का पैसा नहीं है। इसलिए समाधान यह है कि इसे सबसे ऊंचे स्लैब में रखने के अलावा राज्य सरकारों को यह ध्यान रखते हुए वैट वसूलने की अनुमति दी जा सकती है कि कुल टैक्स मौजूदा दर से अधिक ना हो।' 

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