रेलवे की लापरवाही को लेकर रेल मंत्री पियूष गोयल का बयान………

ट्रेनों के संचालन में लापरवाही को लेकर सरकार की हो रही किरकिरी के बाद अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अपना जवाब दिया है रेलवे ने यात्रियों को राहत देते हुए फैसला लिया है कि वह ट्रेनों के संचालन में होने वाली देरी के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार मानेगा और इसका असर उनके प्रमोशन पर भी पड़ेगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे के सभी मंडलों के प्रमुखों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि रेल सेवाओं में देरी होती है तो इससे उनका प्रमोशन प्रभावित होगा। 

रेल मंत्रालय की ओर से अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए ट्रेनों का संचालन समय पर हो इसके लिए उन्हे एक माह का समय दिया गया है। हालांकि यूपी में रेलवे अधिकारियों ने इस बात की जानकारी से अभी इन्कार किया है। लेकिन ये बात सच है कि बीते हफ्ते हुई आतंरिक बैठक में गोयल ने सभी मंडलों के महाप्रबंधकों को फटकार लगायी थी। इसमें मंत्री ने कहा कि ट्रेनों के संचालन में देरी होने से अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान 30 प्रतिशत ट्रेनें अपने नियत समय से लेट चली लेकिन इस बार छुट्टियों में भी कोई सुधार नहीं दिखा।

मंत्रालय ने अधिकारियों को ट्रेनों का समय पर संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक महीने का समय दिया है। एक वरिष्ठ रेलवे सूत्र ने बताया, पिछले हफ्ते हुई आतंरिक बैठक में गोयल ने सभी मंडलों के महाप्रबंधकों को फटकार लगाते हुए कहा कि वह रख-रखाव के कामों की आड़ लेकर ट्रेनों के संचालन में देरी होने से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान 30 प्रतिशत ट्रेनें अपने नियत समय से लेट हुई हैं। यहां तक कि छुट्टियों के सीजन में भी इस स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। 

खासतौर से उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को गोयल के गुस्से का शिकार होना पड़ा। इस मंडल का समयबद्धता प्रदर्शन 29 मई तक केवल 49.59 प्रतिशत रहा। जोकि बीते साल की इसी अवधि की तुलना में 32.74 फीसदी कम है। सूत्र ने कहा, 'मंत्री को जहां यह पता था कि बड़े पैमाने पर ट्रैक्स के रीन्यूअल के चलते भी ट्रेनों के संचालन में देरी हो रही है। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने अधिकारियों से इस समस्या से निपटने के लिए प्रयास करने के लिए कहा।' प्रतिबद्धता के आंकड़े काफी खराब हैं और हमारी अपेक्षा के मुताबिक नहीं हैं। सीधे तौर पर मंडल अधिकारी रख-रखाव के कार्य को ट्रेनों की आवाजाही में होने वाली देरी की वजह बताते रहे हैं।' 

ट्रेनों के संचालन में हो रही लापरवाही को देखते हुए उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक रेल मंत्री पीयूष गोयल ने फटकार भी लगायी है। दरअसल इस मंडल का समयबद्धता प्रदर्शन 29 मई तक केवल 49.59 प्रतिशत रहा। जोकि बीते साल की इसी अवधि की तुलना में 32.74 फीसदी कम है। मंत्री ने अधिकारियों से इस समस्या से निपटने के लिए प्रयास करने के लिए कहा।


बैठक के दौरान मंत्री ने हर एक मंडल अधिकारी को व्यक्तिगत तौर पर बुलाया और उनसे खराब प्रतिबद्धता आंकड़ों को समझाने के लिए कहा। गोयल से पिछले महीने प्रगति बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर सवाल पूछा था। इसके बाद ही उन्होंने सभी मंडलों के अधिकारियों से मुलाकात की है। मुख्य तौर से उत्तर रेलवे के मंडल प्रमुख से जिनका मंडल प्रतिबद्धता इंडेक्स के मामले में सबसे नीचे है।

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