एसएएफ के जवान ने ड्यूटी के दौरान अपनी सर्विस रायफल से गोली मार कर की आत्महत्या

पत्रकार संदीप शर्मा की मौत के बाद उनके परिवार की सुरक्षा के लिए एसएएफ का जवान तैनात किया गया था। घर पर तैनात एसएएफ जवान ने ड्यूटी के दौरान अपनी सर्विस रायफल से खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। घटना मंगलवार की सुबह पांच बजे की है। मृतक के पास से एक पेज का सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें लिखा है कि यह कुकृत्य निजी समस्या और मानसिक तनाव के कारण कर रहा हूं। कुछ बटालियन कर्मचारियों के कारण मन निर्णय लेने में बोझिल होने लगा है। हालांकि पुलिस ने जांच प्रभावित होने के नाम पर सुसाइड नोट को सार्वजनिक नहीं कर रही है। साथ ही पुलिस ने मृतक के शव का पीएम कराकर मर्ग कायम कर प्रकरण जांच में लिया है।

मृतक मुकेश राठौर भिंड जिले की 17वीं बटालियन में पदस्थ था। उसकी ड्यूटी पत्रकार संदीप शर्मा की मौत के बाद उनके अटेर रोड स्थित घर पर चल रही थी। सोमवार की रात मुकेश रोज की तरह अपनी नाइट ड्यूटी पर आया। उसके साथी रिंकू बाथम ने बताया कि वह मोबाइल घर छोड़ आया था। इसलिए फिर घर चला गया। लेकिन समय से वापस लौट आया। मंगलवार की सुबह पांच बजे उसकी ड्यूटी खत्म होने को थी। उसी समय अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। रिंकू ने हड़बड़ाकर देखा तो मुकेश की खून से लथपथ लाश पड़ी थी। पास में ही उसकी सर्विस रायफल पड़ी थी। रिंकू ने तत्काल घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी। वहीं एएसपी डॉ गुरकरन सिंह, एसएएफ कमांडेंट पंकज कुमावत, सीएसपी वीरेंद्र सिंह तोमर, देहात थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव, शहर कोतवाली टीआई शैलेंद्र सिंह कुशवाह, आरआई रजनी गुर्जर सहित फोरेंसिक और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम मौके पर पहुंची। पूरी जांच पड़ताल के बाद मृतक के शव को पीएम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया।

मैं मुकेश राठौर अपने पूरे होश हवास में यह कुकृत्य करने जा रहा हूं। इस कृत्य का जिम्मेदार मेरे विभाग या अधिकारी को न ठहराया जाए। मैं अपनी निजी समस्या एवं मानसिक तनाव के कारण यह गलत कदम उठा रहा हूं। इस कुकृत्य का मेरे अलावा अन्य कोई जिम्मेदार नहीं है। अत: अन्य किसी को परेशान नहीं किया जाए। कुछ वाहिनी के कर्मचारियों के कारण मन निर्णय लेने में बोझिल होने लगा है। इसके कारण स्वेच्छा से कंप्यूटर शाखा कार्य चाहने के बाद भी न करने का आवेदन देकर कार्य से दूर रहने को शारीरिक विचार बर्दाश्त नहीं कर पाया, जिस कारण प्रार्थी मानसिक तनाव में चला गया और यह कुकृत्य कार्य का निर्णय लिया। 
ये भी बताया जा रहा है कि मुकेश का पिछले कुछ दिनों से काम पर मन नहीं लग रहा था। मार्च के महीने में मुकेश ने एसएएफ कमांडेंट से हेडक्वार्टर पर अटैच किए जाने के लिए आवेदन दिया। इस पर उसे बटालियन ऑफिस की कंप्यूटर शाखा में पदस्थ कर दिया गया। इसके बाद वह छुट्टी चला गया। लौटकर 10 दिन काम किया तो फिर उसने खुद को शाखा से हटाए जाने के लिए आवेदन दिया। तो उसे वहां से हटा दिया गया। करीब 20 दिन पहले ही उसकी ड्यूटी संदीप शर्मा के घर पर लगाई गई थी। लेकिन यहां उसने खुद को गोली मार ली।

मुकेश की मौत के बाद पूरा परिवार बुरी तरह टूट गया है। मुकेश के पिता सेवाराम का कहना था कि वह अपनी नौकरी से परेशान चल रहा था। जबकि मां ने रोते हुए कहा कि मुकेश को कई दिनों से छुट्टी नहीं मिल रही थी। वह छुट्टी के लिए परेशान था। वहीं एसएएफ कमांडेंट ने बताया कि पिछले चार महीने में मुकेश 49 दिन अवकाश पर रहा। फरवरी में 7, मार्च में 6, अप्रैल में 21 और मई में 15 दिन की छुटि्टयां मुकेश को मिली थी । हालांकि जून में डीजीपी ने सभी की छुटिट्यों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

मुकेश राठौर वर्ष 2011 में एसएएफ में भर्ती हुआ था। उसकी पोस्टिंग गुना की 24वीं बटालियन में थी। वर्ष 2017 में उसका ट्रांसफर गृह जिला भिंड की 17 बटालियन में हुआ। यहां उसने शहर में स्थित स्वयं के आवास में रहने के लिए अनुमति मांगी। जो कि उसे मिल गई। बताया जा रहा है कि मुकेश ने कुछ समय पहले बटालियन की सहकारी बैंक से ढाई लाख रुपए मकान बनवाने के लिए लोन भी लिया था, जिसमें 50 हजार रुपए उसने लौटा दिए थे।

एसएएफ जवान ने ड्यूटी चेंज के समय सर्विस रायफल से खुद को गोली मार ली। यह सूचना मिलने पर फोरेंसिक और फिंगर प्रिंट लेने वाली टीम ने जांच की है। जवान ने ऐसा कदम क्यों उठाया है यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है

मुकेश राठौर किसी भी तरह के सर्विस मेटर से परेशान नहीं था। जब उसने आवेदन किया तब उसे छुट्टी दी गई। उसे कहीं भी बाहर नहीं भेजा गया। घर पर नौकरी कर रहा था। उसे हर तरह की सुविधा दी जा रही थी जो उसने मांगी थीं। सुसाइड उसने क्यों किया इस मामले की पुलिस जांच कर रही है।

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