संभल में मानव अंग तस्करों का कहर

जनपद संभल मानव अंग तस्करी आपने तस्करी तो बहुत सुनी होगी। मगर जनपद संभल में कुछ ऐसे भी लोग हे जो गरीव इंसान के लीवर की तस्करी करते हे। आज हम आपको संभल के तीन ऐसे इंसानो के घिनोने चहरे आपको दिखाएगे की आप देखकर और सुनकर दंग रहजायेगे और आप का किसी भी मुँह बोले रिश्ते पर से बिश्बास उठने लगेगा। ये तीनो तस्कर कायदे पिलस कानून से मानव अंग तस्करी करते हे। मगर पहले गरीव नोकर को अपना मुँह बोला रिश्ते दार बनाते हे। और पैसो का लालच देकर गरीव के लीवर ट्रांसबर की बो सारी कानूनी कार्येबाही पूरी कराते हे। जो समाज और कानून की आँखों में धूल झोकने का काम करे और नोकर को रिश्तेदार बनाकर  अपने घर में सालो से नोकरी कर रहे गरीव परिबार को यह झांसा देकर उसका लिवर निकलबा लेते हे।

untitled अगर वो उसको अपना लीवर दे देता हे तो बह उसको पाँच लाख नकद सौ गज का मकान और गरीव नोकर की पाँच बेटीयो की तीनो तश्कर  शादी करा देगे।  भगवान  का बनाया गरीब इंसान अपनी गरीवी और बेबसी के आगे लाचार हो जाता हे। और अपने मालीक का ये सौदा अपने परिबार के खातिर मानलेता है और अपने शरीर का मेन अंग लीवर निकलबाने को तैयार हो जाता है बही तीनो अंग तस्करो ने नोकर को अपना मुँह बोला रिश्तेदार इस लिए बना लिया कि लीबर ट्रांसबर के दौरान अगर कोई प्रशासनिक पूछताछ हुई तो नोकर को हमारे घर के सारे रिश्ते दारो व परिबार के बारे में सही नाम ब पते मालूम हे। हम कहीं भी फर्जी साबित नही होंगे। और मुरादाबाद के एक पीतल एक्सपोर्टर बड़े ब्यपारी को अपने यहाँ काम कर रहे नोकर परिबार के मुखिया का अंग पीतल करोबारी का सगा सुसर बताकर दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में सारी कानूनी कार्यबाही पूरी करा कर लीवर ट्रान्सबर करा दिया।

मगर तीन साल बीतने के बाद भी तस्करो ने नोकर को कुछ नही दिया अपना मतलव निकलने के बाद तीनो तस्करो ने नोकर से  मुँह बोले सारे रिश्ते ख़त्म कर दिये और आज बेबस नोकर दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर है शरीर का मेन अंग लीबर निकल बाने के बाद नोकर परिबार का गरीव मुखिया का शरीर आज मेहनत मजदूरी भी नही कर सकता  और आज गरीव परिबार भीख मांगने की कगार पर है। 

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