बुलंदशहर रेप मामले में SC ने लगाई आज़म खान को लताड़

बुलंदशहर में NH-91 पर मां-बेटी के साथ हुए गैंगरेप को सियासी साजिश करार देना आजम ख़ान को भारी पड़ गया…सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान को पीड़ित परिवार से बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। अखिलेश के बड़बोले मंत्री आजम खान को आखिरकार उनकी बदजुबानी भारी पड़ गई। गैंगरेप मसले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आजम खान की जमकर खिंचाई की…और उनसे पीड़ित परिवार से बिना शर्त माफी मांगने को कहा। बेंच ने आजम से इस बाबत एक हलफनामा दायर करने के लिए भी कहा…अदालत ने कहा, उन्हें अपने हलफमाने में लिखना चाहिए कि उनका इरादा पीड़ितों को दुख पहुंचाने का नहीं था…लेकिन अगर फिर भी उन्हें दुख पहुंचा है या वे अपमानित महसूस करते हैं तो वो बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं।

मामले की अगली सुनवाई 7 दिसम्बर को होगी…तब तक आजम को बिना शर्त माफी का हलफनामा दायर करना होगा…न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह सामूहिक बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की का उसके घर के नजदीक किसी केंद्रीय विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित करे। साथ ही, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता के दाखिले और शिक्षा पर आने वाला सारा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी। गुरुवार को ही आजम ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कहा कि वे रेप पीड़ितों के दर्द को पूरी तरह से समझते हैं…हलफनामे में उन्होंने कहा कि वे मंत्री के तौर पर और निजी तौर पर भी उनकी मदद करने के लिए तत्पर हैं।

उन्होंने मैंने कभी भी रेप पीड़ितों पर सवाल नहीं उठाए न ही उनके खिलाफ कुछ बोला. आजम ने कहा वे ऐसे घृणित अपराध की शिकार महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने की सोच भी नहीं सकते. वे सालों से समाजसेवा कर रहे हैं और एक यूनिवर्सिटी भी बनाई है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करती है. आजम ने हलफनामे में दलील दी कि उन्होंने कभी भी नहीं कहा कि यह राजनीतिक साजिश है। उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। इसके लिए आजम ने सुप्रीम कोर्ट में सीडी भी दी है। उनका कभी उद्देश्य नहीं रहा कि वे किसी पीड़ित महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाएं. वे रेप पीड़ितों का दर्द समझते हैं…दाखिल अर्जी में सारे आरोप बेबुनियाद हैं. अर्जी को खारिज की जाए. इसके बाद कोर्ट ने आजम को फटकार लगाई। और बिना शर्त माफी मांगने को कहा। कोर्ट ने आजम से कहा था- आरोप पर जवाब दीजिए। पिछली सनवाई में आजम के वकील कपिल सिब्बल ने कहा था- खान ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था कि गैंगरेप राजनीतिक साजिश है।

उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।  इस पर कोर्ट ने आजम से आरोप का जवाब देने को कहा था…इतने सारे अखबार कैसे ग़लत ख़बर छाप सकते हैं…आखिर प्रेस की भी देश के प्रति जवाबदेही होती है। कोर्ट के सहायक फली एस नरीमन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मसले पर तो आजम के खिलाफ मामला खत्म हो जाता है लेकिन कोर्ट ने गैंगरेप और रेप जैसे अपराधों पर नेता और मंत्रियों के बयान पर जो सवाल उठाए थे वो अभी खत्म नहीं हुए हैं.  कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रेप जैसे अपराधों पर नेताओं का गैर-जिम्मेदाराना तरीके से बयानबाजी करना ठीक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 7 दिसंबर को आजम के माफीनामे पर विचार किया जाएगा. 29 जुलाई की रात हुए इस खौफनाक वारदात को सियासी साजिश करार देने के आजम की बयान की चौतरफा आलोचना हुई थी…राजनीतिक पार्टियों ने तो उन्हें आड़े हाथों लिया ही था…पीड़ित बच्ची के पिता ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आजम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

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