राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल भी शिक्षकों की किल्लत, बच्चे साइंस की जगह कर रहे आर्ट्स की पढ़ाई

हरियाणा सरकार हरियाणा को शिक्षा का हब बनाना चाह रही है…दूसरी ओर वहां के सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है। रेवाड़ी जिले के रतनथल गांव का राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल भी शिक्षकों की किल्लत का सामना कर रहा है। कुछ साल पहले तक यहां 600 बच्चे पढ़ रहे थे…लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते यहां अब केवल 498 बच्चे ही रह गए हैं। उन्हें भी अपना भविष्य अंधकारमय नज़र आ रहा है। कहां तो ये बच्चे ऊंची उड़ान भरने का सपना देख रहे थे..कहां शिक्षकों की कमी के कारण उड़ने से पहले ही इनके पर कट कर जमीन पर गिर रहे हैं। पिछले डेढ़ सालों से स्कूल में मैथ, फिजिक्स, सोशल साइंस तक के टीचर नहीं है। अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हाँ की यहां बच्चे कैसी शिक्षा ले रहें होंगे और आगे चलकर इनका भविष्य क्या होगा। आलम यह है कि जो बच्चे साइंस पढ़कर अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। वे मजबूरी में आर्ट्स की पढ़ाई कर रहे हैं।

 इस विद्यालय में शिक्षकों का टोटा काफी समय से है। यहां कम से कम 10 शिक्षकों की ज़रूरत है। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने शिक्षकों की कमी की शिकायत आलाधिकारियों से नहीं की..जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर उपायुक्त, शिक्षा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री…ग्रामीण सबसे फरियाद कर रहे हैं। लेकिन किसी के पास उनकी समस्याओं को दूर करने का वक्त नहीं है…लिहाजा ग्रामीण ने अब फैसला लिया है कि अगल जल्द ही शिक्षकों की कमी को दूर नहीं किया जाता है तो वे स्कूल में ताला जड़ देंगे

शिक्षा को भी मौलिक अधिकार घोषित कर दिया गया है। शिक्षा के नाम पर हर साल करोड़ों खर्च भी किए जा रहे हैं.. बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए मिड डे मील अभियान चलाया जा रहा है…बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारे गढ़े जा रहे हैं…लेकिन शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कुछ भी नहीं किया जा रहा है…ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब स्कूल में शिक्षक ही नहीं होंगे तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे…और अगर पढ़ेंगे नहीं तो कैसे बढ़ेंगे

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com