अगवा इंजीनियरों की रिहाई के लिए सुषमा स्वराज ने अफगानिस्तान के विदेशमंत्री से की बात

अफ़ग़ानिस्तान के बाग़लान प्रांत से अगवा कर लिए सात भारतीय इंजीनियरों को छुड़ाने के लिये भारत सरकार ने कोशिश जोर-शोर से शुरू कर दी है अफगानिस्तान में भारतीय कंपनी आरपीजी के सात कर्मचारियों को तालिबान ने बंधक बना लिया है. इंजीनियरों की रिहाई के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अफगानिस्तान के विदेशमंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी से बात की है. सूत्रों के मुताबिक अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने सुषमा स्वराज को इस बारे में जानकारी दी है और कहा है कि भारतीय इंजीनियरों की रिहाई के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक भारतीय दूतावास में तैनात दो भारतीय अधिकारियों ने भी इस अपहरण की पुष्टि की है.

इससे पहले 2014 में कैथोलिक प्रीस्ट फ़ादर ऐलेक्सिस प्रेम कुमार को हेरात से अगवा कर लिया गया था और साल 2015 में छोड़ा गया था. वहीं आगा खान फ़ाउंडेशन में काम करने वाली वर्कर जूडिथ डिसूज़ा को साल 2016 में काबुल से अगवा किया गया था और उन्हें एक महीने में छुड़ा लिया गया था.

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, "हम भारतीय नागरिकों के अफगानिस्तान के बगलान प्रांत से अपहरण की घटना से अवगत हैं. हम अफगानिस्तान अधिकारियों के संपर्क में हैं और आगे के विवरणों का पता लगाया जा रहा है."


 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान ने भारतीय कर्मचारियों को सरकारी अफसर समझ कर अगला किया है. फिलहाल स्थानीय लोगें की मदद से तालिबान से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है.


बता दें कि अफगानिस्तान के बगलान प्रांत में आरपीजी समूह की एक कंपनी में काम करने वाले सात भारतीय इंजीनियरों को रविवार को कथित तौर पर तालिबान के बंदूकधारियों ने अगवा कर लिया. अफगान मीडिया के मुताबिक इन लोगों को संभवत सरकारी कर्मचारी समझकर उठा लिया गया.अगवा किए गए कर्मचारी केईसी के लिए काम करते हैं. ये कंपनी आरपीजी समूह की कंपनी है. यह अफगानिस्तान में काम कर रही बड़ी भारतीय कंपनियों में से एक है. इसका काम देश में बिजली की आपूर्ति करना है.

 

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह घटना तब हुई जब कर्मचारी उस इलाके का दौरा कर रहे थे, जहां कंपनी को एक बिजली का सब स्टेशन स्थापित करने के लिए ठेका मिला है. अफगानिस्तान में 150 से ज्यादा इंजीनियर और टेक्निकल एक्सपर्ट देश के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट में काम करते हैं.

 

इस पावर प्लांट पर तालिबानी पहले भी कई बार निशाना भी बना चुके हैं. स्थानीय अफ़ग़ान अधिकारी इस अपहरण के लिए तालिबान को ज़िम्मेदार मान रहे हैं. हांलाकि इस वक्त अफ़ग़ानिस्तान में आईएसआईएस समेत कई छोटे-बड़े आतंकी संगठन सक्रिय हैं इसलिए भारत को इन नागरिकों की सकुशल वापसी के लिए फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा.

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com