मध्य प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को लगा झटका

मध्य प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को झटका लगा है. राज्य में मतदाता सूचियों में भारी पैमाने पर गड़बड़ी होने की कांग्रेस की शिकायत को चुनाव आयोग ने जांच के बाद गलत बताया है. आयोग की ओर से शुक्रवार देर शाम कांग्रेस को भेजी गयी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायत के आधार पर गठित जांच दलों ने राज्य के चार विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों का निरीक्षण किया, जिनमें गड़बड़ी जैसी कोई कोई बात नहीं मिली है.

दरअसल मध्यप्रदेश के वोटर लिस्ट में 60 लाख फर्जी वोटरों को जोड़े जाने को लेकर की गई शिकायत को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. गौरतलब है कि इस मामले के सामने आने के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने राज्य चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की थी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की थी. चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई दम नहीं है. आयोग ने कहा कि तस्वीर रिपीट होने से जुड़ी गलतियों को ठीक किया जा रहा है. चुनाव आयोग ने राज्य में वोटरों की संख्या में वृद्धि को एक सामान्य सी चीज के तौर पर लेने की बात भी कही.

आयोग ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ द्वारा गत तीन जून को की गयी शिकायत में वर्णित गड़बड़ी वाले विधानसभा क्षेत्रों नरेला, होशंगाबाद, भोजपुर और सिओनी मालवा में मतदाता सूचियों की विस्तृत जांच करायी। इनमें से सिओनी मालवा क्षेत्र में 17 मतदान केन्द्रों की 82 सूचियों में से किसी में भी मतदाताओं के नाम का एक से अधिक बार उल्लेख नहीं पाया गया। जबकि इसी विधानसभा क्षेत्र के 20 मतदान केन्द्रों की मतदाता सूचियों में 2442 नाम मिलते जुलते पाये गये। इसकी जांच में 2397 नाम सही पाये गये जबकि 45 नामों को संबद्ध मतदाता की मौत या स्थानांतरण के कारण मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया चल रही है।

 आयोग की ओर से शुक्रवार देर शाम कांग्रेस को भेजी गयी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायत के आधार पर गठित जांच दलों ने राज्य के चार विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों का निरीक्षण किया, जिनमें गड़बड़ी जैसी कोई कोई बात नहीं मिली है.

इसी तरह नरेला विधानसभा क्षेत्र की शिकायत में मतदाता सूची के 22252 नामों में से 17684 मतदाताओं के मामले अनूठे पाये गये। इनमें से 1776 मामलों में मतदाता के नाम और उसके रिश्तेदार के नाम एक ही पाए गए। इनमें से 154 मामलों की जांच में 153 मामले सही पाये गये। रिपोर्ट के अनुसार जांच दल ने होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र की शिकायत में वर्णित 552 मामलों की जांच की जिसमें एक भी मतदाता का नाम मतदाता सूची में अनेक बार दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुयी। वहीं भोजपुर में शिकायत वाले 36 मामलों की जांच में 29 के नाम सही पाये गये जबकि सात मामलों को मतदाता सूची दुरुस्त करने की प्रक्रिया के तहत सही कर लिया जायेगा। 

आयोग ने विस्तृत जांच के आधार पर निष्कर्ष के तौर पर कहा कि इन चारों विधानसभा क्षेत्रों में एक ही मतदाता का नाम मतदाता सूची में कई बार दर्ज होने के मामलों की बहुतायत होने की शिकायत सही नहीं है। जबकि एक ही तस्वीर वाले अनेक मतदाता पाये जाने की शिकायत को आयोग ने यह बताते हुये सही नहीं पाया कि यह एक ही मतदाता का सूची में बार बार उल्लेख का मामला नहीं है। बल्कि यह महज एक ही फोटो के अनेक बार उपयोग का मामला है जिसे ठीक करने के लिये कह दिया गया है। 

आयोग ने फर्जी मतदाता सूची की शिकायत पर कहा कि मध्य प्रदेश में जनसंख्या के हिसाब से मतदाताओं की हिस्सेदारी साल 2008 में 52.76 प्रतिशत से बढ़कर 2018 में 61.45 प्रतिशत हो गयी है. इसलिये जनसांख्यकीय आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूचियों को अपडेट किया गया है. इस आधार पर इसे फर्जी मतदाता सूची का मामला नहीं माना जा सकता है. आयोग ने शिकायत के विभिन्न आधारों की पुख्ता जांच के बाद इन्हें खारिज करते हुये कांग्रेस से इस तरह की आशंकायें पाये जाने पर भविष्य में भी सूचित करने का आग्रह किया जिससे शंकाओं का तत्काल समाधान किया जा सके.

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com