फिर शर्मसार हुआ डॉक्टरी पेशा

शामली (आकाश मलिक)

धरती के भगवान माने जाने वाले डॉक्टरों ने एक बार फिर डॉक्टरी पेशा को शर्मसार करने का काम किया है। इस बार मामला शामली जनपद के कांधला राजकीय अस्पताल का है। हसनपुर लिसाड गांव की रहने वाली महिला मुकेश का 25 साल का बेटा दीपक पिछले एक महीने से बुखार से पीड़ित चल रहा था…परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वो अपने बेटे का प्राइवेट में इलाज नहीं करा पा रही थी…महिला ने पड़ोस के ही एक युवक से 108 एंबुलेंस पर फोन करवाया। महिला अपने बीमार बेटे को लेकर राजकीय अस्पताल पहुंची…वह घंटों तक अस्पताल के प्रांगण में बैठी रही…उसका बेटा फर्श पर पड़ा दर्द से तड़पता रहा…महिला बार-बार डॉक्टरों से अपने बेटे का इलाज करने की गुहार लगाती रही…इस गुहार को सुनकर शायद ऊपर वाले को भी महिला पर तरस आ जाता…लेकिन धरती के भगवानों का दिल नहीं पसीजा…और उन्होंने उसका इलाज करने की ज़रूरत नहीं समझी…

इसी बीच कुछ मीडियाकर्मी अस्पताल पहुंचे…तो महिला ने रोते-रोते अपनी तकलीफ मीडियाकर्मियों को बताई…जब अस्पताल कर्मचारियों की नजर मीडिया कर्मियों पर पड़ी… तो उनमें हड़कंप मच गया…आनन-फानन में बीमार दीपक को दवा देकर अस्पताल में सुविधा नहीं होने का हवाला देते हुए मुजफ्फरनगर रेफर कर दिया गया…आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला के पास किराये को भी पैसे नहीं थे…किसी तरह अस्पताल में मौजूद दूसरे लोगों ने महिला को पैसे देकर अस्पताल से भेजा…जब इस बाबत मीडियाकर्मियों ने डॉक्टरों से सवाल पूछा…तो उनका जवाब हैरान करने वाला था…चिकित्सक ने कहा कि अगर ज्यादा परेशान किया तो वे मेडिकल लीव पर चले जाएंगे…आखिर लीव लेने से तो उन्हें कोई रोक नहीं सकता। इस जवाब को सुनकर कोई भी संवेदनशील इंसान सकते में आ जाए…लेकिन लगता है डॉक्टरों को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता है…तभी तो उनके सामने एक इंसान फर्श पर पड़ा तड़पता रहता है और वे उसका इलाज करने की बजाय…तफरीह करना ज्यादा पसंद करते हैं….

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