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मलयालम सिनेमा के दिग्गज श्रीनिवासन का निधन: शोक में डूबा कला जगत

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भारतीय सिनेमा के लिए एक दुखद खबर में, दिग्गज मलयालम अभिनेता, पटकथा लेखक और निर्देशक श्रीनिवासन का शनिवार को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 69 वर्ष के थे। समाज पर अपने तीखे व्यंग्य और हास्य के लिए मशहूर श्रीनिवासन पिछले काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों और सांस की तकलीफ से जूझ रहे थे।

एक युग का अंत

80 और 90 के दशक में मलयालम सिनेमा को एक नई दिशा देने वाले श्रीनिवासन को इस सप्ताह की शुरुआत में स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन के समय उनके दोनों बेटे—प्रसिद्ध निर्देशक विनीत श्रीनिवासन और अभिनेता ध्यान श्रीनिवासन—उनके पास मौजूद थे।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “श्रीनिवासन एक दुर्लभ प्रतिभा थे जिन्होंने समाज की खामियों को उजागर करने के लिए हास्य का सहारा लिया। उनका जाना केरल के सांस्कृतिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”

नेट वर्थ और जीवनशैली: सादगी की मिसाल

चार दशकों से अधिक लंबे करियर और लगभग 250 फिल्मों के बावजूद, श्रीनिवासन अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे। 2025 के अनुमानों के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये आंकी गई है। उनकी आय का मुख्य स्रोत उनकी सफल पटकथाएं और निर्देशन रहा। हालाँकि, उन्होंने कभी भी फिल्मी चमक-धमक वाली विलासी जीवनशैली नहीं अपनाई। वे कोच्चि में एक साधारण घर में रहते थे और जैविक खेती (Organic Farming) के बड़े समर्थक थे।

मध्यम वर्ग की आवाज

1956 में कन्नूर में जन्मे श्रीनिवासन ने “हीरो” की पारंपरिक परिभाषा को बदल दिया। उन्होंने नादोदिक्काट्टु और गांधीनगर 2nd स्ट्रीट जैसी फिल्मों के माध्यम से बेरोजगारी और राजनीति पर तीखा प्रहार किया। उनकी 2007 की फिल्म कथा परायुमबोल इतनी सफल रही कि इसे हिंदी में ‘बिल्लू’ के नाम से बनाया गया।

फिल्म समीक्षक मणि प्रसाद ने कहा:

“श्रीनिवासन ने केवल अभिनय नहीं किया, उन्होंने मलयाली मानसिकता को पर्दे पर उतारा। उन्होंने हमें अपनी कमियों पर हंसना सिखाया। उनके जैसा लेखक और कलाकार दोबारा मिलना मुश्किल है।”

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