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एक घंटे में डूबे 12 लाख करोड़ रुपये: आज क्यों क्रैश हुआ शेयर बाजार?

SamacharToday.co.in - एक घंटे में डूबे 12 लाख करोड़ रुपये आज क्यों क्रैश हुआ शेयर बाजार - Credited by The Times of India

भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन ‘ब्लैक मंडे’ साबित हुआ। मिडिल-ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के कारण बाजार खुलते ही निवेशकों में भारी घबराहट देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे महज एक घंटे के भीतर निवेशकों की 11.78 ट्रिलियन (लगभग 12 लाख करोड़) रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई।

बाजार की मौजूदा स्थिति

सोमवार सुबह 10:23 बजे तक, बीएसई (BSE) में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण गिरकर 416.98 ट्रिलियन रुपये रह गया, जो शुक्रवार को बंद होने पर 428.76 ट्रिलियन रुपये था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि सभी सेक्टरों में चौतरफा बिकवाली देखी गई।

विभवंगल अनुकूलकारा के संस्थापक और एमडी सिद्धार्थ मौर्य ने कहा, “ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने भारतीय बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। एक घंटे में 12 लाख करोड़ रुपये का नुकसान दिखाता है कि निवेशक कितने डरे हुए हैं और सुरक्षित संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं।”

बाजार गिरने के 6 मुख्य कारण

1. मध्य पूर्व में गहराता संघर्ष: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चौथे हफ्ते में प्रवेश कर गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है, के बंद होने की आशंका ने निवेशकों को इक्विटी से दूर कर दिया है।

2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। इस महीने कच्चे तेल की कीमतों में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है।

3. रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपया 93.94 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में 3% की गिरावट आई है, जिससे आयात महंगा हो गया है और महंगाई बढ़ने का डर है।

4. सभी सेक्टरों में भारी बिकवाली: बाजार में यह गिरावट किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि ‘पैनिक सेलिंग’ के कारण सभी क्षेत्रों में रही। प्रमुख गिरावट वाले शेयर:

5. विदेशी निवेशकों (FPI) की निकासी: अनिश्चितता के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बिकवाली तेज कर दी है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक भारतीय बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की गई है। केवल मार्च महीने में (20 मार्च तक) 1,03,967 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई है।

6. वैश्विक बाजारों के खराब संकेत: गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई बाजारों में भी 6% तक की गिरावट देखी गई है। निवेशकों को डर है कि लंबे समय तक तनाव रहने से वैश्विक विकास दर धीमी हो जाएगी और ब्याज दरों में कटौती में देरी होगी।

निवेशकों के लिए सलाह

बाजार की दिशा फिलहाल पूरी तरह से वैश्विक घटनाक्रमों, विशेष रूप से ईरान-अमेरिका संघर्ष और तेल की कीमतों पर निर्भर है। सिद्धार्थ मौर्य का सुझाव है कि निवेशकों को फिलहाल घबराहट में कोई फैसला लेने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए और केवल उन शेयरों पर ध्यान देना चाहिए जिनके फंडामेंटल मजबूत हैं।

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