केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Jitendra Singh ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है और भविष्य की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने के लिए अपनी क्षमताओं का लगातार विस्तार कर रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित एक मीडिया कॉन्क्लेव के दौरान बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में शुरू किए गए नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) ने केवल तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों का आधे से अधिक हिस्सा हासिल कर लिया है। उन्होंने बताया कि भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार (Quantum Secure Communication) के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसका उपयोग रक्षा, साइबर सुरक्षा, रणनीतिक संचार और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जा सकता है। उनके अनुसार, भारत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और संबंधित अनुसंधान में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डॉ. सिंह ने कहा कि जो देश अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम तकनीकों में हो रहे विकास के साथ कदम नहीं मिला पाएंगे, वे केवल आर्थिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि रणनीतिक सुरक्षा के मामले में भी पीछे रह जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा इन अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित होगी और भारत इस दौड़ में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एआई अब केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवाओं में बदलाव लाने वाला प्रमुख माध्यम बन चुका है। सरकार एआई आधारित विकास को गति देने के लिए कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा संसाधनों, क्लाउड क्षमता और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों को मजबूत कर रही है, ताकि देश डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई जरूरतों को पूरा कर सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में लागू किए गए कई नीतिगत सुधारों ने विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने से देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिली है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हाल के सुधारों से निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
डॉ. सिंह ने परमाणु ऊर्जा को भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भविष्य में डेटा सेंटर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होगी। परमाणु ऊर्जा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस नीति ने भारत की उच्च शिक्षा और अनुसंधान व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। अब विद्यार्थियों को बहुविषयक शिक्षा और अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनने की अधिक स्वतंत्रता मिल रही है। इससे बड़ी संख्या में युवा अनुसंधान और नवाचार की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो भविष्य में देश के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास को नई दिशा देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। अब नवाचार केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों के सहयोग से नई तकनीकों का विकास हो रहा है। उनके अनुसार, वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों का साझा उपयोग ही वैज्ञानिक प्रगति की सबसे बड़ी कुंजी है और भारत इसी दिशा में मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं से विज्ञान और नवाचार को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी के पास ज्ञान और तकनीक तक पहले से कहीं अधिक पहुंच है। यदि युवा वैज्ञानिक सोच विकसित कर नई तकनीकों में योगदान दें, तो भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के साथ दुनिया की अग्रणी नवाचार आधारित अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
