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जलवायु जोखिम को आर्थिक नीति का केंद्र बनाएं: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस

जलवायु जोखिम को आर्थिक नीति का केंद्र बनाएं संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस - SamacharToday.co.in

संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने दुनिया भर के वित्त मंत्रियों, केंद्रीय बैंकों और नीति निर्माताओं से जलवायु जोखिम को आर्थिक नीति के केंद्र में रखने का आह्वान किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ते सूखे, बाढ़ और अन्य चरम मौसमीय घटनाओं के कारण जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि आर्थिक स्थिरता और विकास का भी प्रमुख विषय बन चुका है।

लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान अपने संबोधन में गुटेरेस ने कहा कि जलवायु अनुकूलन को लंबे समय से कम आंका गया है और इसके लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों को जलवायु जोखिम को राजकोषीय नीति, निवेश योजनाओं और नियामक ढांचे का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

गुटेरेस के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केवल पारंपरिक वित्तीय साधन पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर विशेष कर, मिश्रित वित्तीय मॉडल (Blended Finance) और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने वाली गारंटी जैसी व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी। उन्होंने जीवाश्म ईंधन कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगाने की भी वकालत की और कहा कि इससे प्राप्त धनराशि को जलवायु अनुकूलन तथा जलवायु आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई में लगाया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने वैश्विक विकास बैंकों में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के शेयरधारकों को उन्हें अधिक पूंजी और संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए ताकि वे जलवायु लचीलापन बढ़ाने वाली परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर ऋण प्रदान कर सकें।

उन्होंने विशेष रूप से विकासशील देशों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। गुटेरेस ने कहा कि गरीब और विकासशील राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, लेकिन उनके पास तैयारी और अनुकूलन के लिए सबसे कम संसाधन उपलब्ध हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि विकासशील देशों को वर्ष 2035 तक हर साल 310 से 365 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी, जबकि 2023 में उन्हें केवल लगभग 26 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी।

गुटेरेस ने यह भी कहा कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली को जलवायु लचीलापन और जोखिम कम करने के प्रयासों को अधिक महत्व देना चाहिए। उनके अनुसार, जो देश आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए निवेश कर रहे हैं, उन्हें कम ब्याज दरों और बेहतर बीमा सुविधाओं के रूप में प्रोत्साहन मिलना चाहिए, न कि वित्तीय दंड।

उन्होंने बीमा कंपनियों, नियामकों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से भी अपील की कि वे जलवायु अनुकूलन प्रयासों को अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल करें। इससे निजी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और जलवायु परियोजनाओं में पूंजी निवेश आसान होगा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने समय रहते तैयारी को जलवायु संकट से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका बताया। उन्होंने सार्वभौमिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems), आपदा पूर्व वित्तपोषण और सस्ती बीमा योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि जलवायु आपदाओं को वित्तीय संकट में बदलने से रोकना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में गुटेरेस ने कहा कि जलवायु अनुकूलन केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और जलवायु न्याय का भी महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से जलवायु वित्त की खाई को पाटने और कमजोर देशों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।

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